300 मीटर गहराई में करेगा निगरानी…भारतीय नौसेना को जल्द मिलेगा ‘निपुण’ अंडरवॉटर रोबोट

भारतीय नौसेना की समुद्री बचाव और गहरे समुद्र में ऑपरेशन की क्षमता जल्द और मजबूत होने वाली है. सूत्रों के मुताबिक, नौसेना का अत्याधुनिक डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) निपुण सितंबर 2026 के आसपास मुंबई में औपचारिक रूप से नौसेना में कमीशन किया जा सकता है. ये जहाज स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता का बड़ा उदाहरण है.

निपुण को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम ने स्वदेशी डिजाइन और निर्माण के साथ तैयार किया है. ये निस्तार-क्लास का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल है. इससे पहले इसी क्लास का पहला जहाज INS निस्तार भारतीय नौसेना को मिल चुका है. निपुण को सी ट्रायल के लिए जुलाई 2026 में नौसेना को सौंपा गया था.

300 मीटर की गहराई तक डाइविंग क्षमता

  1. #निपुण को खास तौर पर डीप-सी डाइविंग, पनडुब्बी बचाव, समुद्र के भीतर मरम्मत, साल्वेज और सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है.
  2. जहाज में करीब 300 मीटर की गहराई तक डीप-सी सैचुरेशन डाइविंग की सुविधा है.
  3. इसके अलावा साइड डाइविंग स्टेज के जरिए करीब 75 मीटर तक के डाइविंग ऑपरेशन किए जा सकते हैं.
  4. जहाज में डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम (DP-II) भी लगाया गया है, जिससे यह बिना एंकर डाले समुद्र में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है.
  5. गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव अभियान के दौरान यह क्षमता बेहद अहम होती है.

पनडुब्बी हादसे में बनेगा बड़ी ताकत

  1. निपुण की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (DSRV) मदर शिप के रूप में काम करना है.
  2. जरूरत पड़ने पर यह DSRV को लॉन्च, रिकवर और सपोर्ट कर सकता है.
  3. इससे समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त पनडुब्बी के भीतर फंसे नौसैनिकों को बाहर निकालने में मदद मिलेगी.
  4. इसके अलावा जहाज पर रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) मौजूद होंगे, जो पानी के भीतर निरीक्षण, निगरानी और साल्वेज ऑपरेशन में मदद करेंगे.

हेलीकॉप्टर और मेडिकल सुविधाओं से लैस

  1. निपुण पर करीब 15 टन तक के हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए हेलिपैड भी है.
  2. जहाज में डीकंप्रेशन चैंबर, मून पूल, हाइपरबेरिक मेडिकल सुविधाओं के साथ अस्पताल जैसी चिकित्सा व्यवस्था भी दी गई है.
  3. इसमें गंभीर मामलों के लिए ICU और ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

8,500 टन से ज्यादा का विशाल जहाज

निपुण की लंबाई करीब 118.4 मीटर और बीम 22.8 मीटर है. इसका विस्थापन करीब 8,560 टन से ज्यादा बताया जाता है.जहाज में दो डीजल इंजन लगाए गए हैं और इसकी अधिकतम गति करीब 18 नॉट तक हो सकती है. इसे लंबे समुद्रीअभियानों के लिए तैयार किया गया है और करीब 60 दिन तक लगातार ऑपरेशन करने की क्षमता बताई जाती है.

जहाज में करीब 75 से 80 प्रतिशत या उससे अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. आत्मनिर्भर भारत और नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम के लिहाज से भी निपुण महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

निपुण के हथियार और उनकी भूमिका

  1. निपुण पर दो AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं.
  2. यह 6 बैरल वाली 30 मिमी ऑटोमैटिक रोटरी गन है.
  3. इसकी फायरिंग रेट लगभग 4,0005,000 राउंड प्रति मिनट तक हो सकती है.
  4. इसका मुख्य काम जहाज की नजदीकी सुरक्षा है जैसे कम दूरी पर आने वाले हवाई या समुद्री खतरों के खिलाफ अंतिम स्तर की रक्षा.
  5. DRDO ने AK-630 के लिए 30 मिमी HEPF (High Explosive Pre-Fragmented) गोला-बारूद भी विकसित किया है, जिसकी खासियत बेहतर fragmentation lethality है और इसे ड्रोन स्वॉर्म जैसे लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी बनाने के लिए विकसित किया गया है.

पश्चिमी तट पर होगी तैनाती

निपुण के मुंबई में कमीशन होने के बाद इसके भारतीय नौसेना के पश्चिमी तट पर तैनात होने की उम्मीद है. ये जहाज गहरे समुद्र में डाइविंग, पनडुब्बी बचाव, समुद्री दुर्घटनाओं में राहत और पानी के भीतर साल्वेज ऑपरेशन में नौसेना की क्षमता को बढ़ाएगा.

निपुण के शामिल होने से भारतीय नौसेना के पास न केवल एक अत्याधुनिक डाइविंग सपोर्ट प्लेटफॉर्म आएगा, बल्कि पनडुब्बी बचाव और गहरे समुद्र में मुश्किल मिशन के लिए उसकी अंडरवॉटर ऑपरेशनल क्षमता भी मजबूत होगी.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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