‘ट्यूशन’ को कहा ‘नो’, परीक्षा में लाया 100%: सरकारी स्कूलों के इस सुपर फॉर्मूले ने रच दिया इतिहास!

सरकारी स्कूलों को लेकर अक्सर लोगों की धारणा होती है कि वहां बुनियादी सुविधाओं और बेहतर पढ़ाई का अभाव रहता है। लेकिन गुजरात के मेहसाणा और महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (अहमदनगर) के दो स्कूलों ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। पढ़ाने के अनूठे तरीकों, अनुशासन और जनभागीदारी के दम पर इन स्कूलों ने न केवल अपना परिणाम 100% कर लिया है, बल्कि बच्चों को ‘सुपरस्टूडेंट्स’ और स्मार्ट नागरिक बना रहे हैं।

मेहसाणा का जागृति विद्यालय: 60% से 100% तक का सफर

गुजरात के मेहसाणा जिले के सापावाड़ा गांव स्थित जागृति विद्यालय का वर्ष 2022 में 10वीं का रिजल्ट महज 60% रहता था। स्कूल ने अपनी शैक्षणिक रणनीति बदली और पिछले तीन वर्षों से लगातार 100% परिणाम हासिल कर रहा है।

  • जीरो पीरियड और एक्स्ट्रा क्लास: सत्र के पहले ही दिन से सुबह 10 बजे अतिरिक्त ‘जीरो पीरियड’ लगाया जाता है, जिसमें छात्रों की 100% उपस्थिति रहती है।
  • समय से पहले सिलेबस खत्म: बोर्ड परीक्षा से डेढ़ महीने पहले ही पूरा पाठ्यक्रम समाप्त कर दिया जाता है। इसके बाद छात्रों से हर विषय के 5 से 6 मॉडल पेपर हल करवाए जाते हैं।
  • निजी ट्यूशन पर बैन: स्कूल में छात्रों के निजी कोचिंग या ट्यूशन जाने पर पूरी तरह रोक है। इससे बच्चे पढ़ाई की एक ही पद्धति पर ध्यान केंद्रित करते हैं और भ्रम से बचते हैं।
  • प्राचार्य की सक्रियता: स्कूल में दो शिक्षकों के पद खाली होने के बावजूद प्राचार्य अशोकभाई पटेल खुद गणित पढ़ाते हैं और पूरी योजना का नेतृत्व करते हैं।

अहिल्यानगर का निमगांव वाघा स्कूल: 5 करोड़ में बनी ‘व्हाइट हाउस’ जैसी इमारत

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित निमगांव वाघा के जिला परिषद स्कूल में कभी पीने के पानी तक की किल्लत थी। आज यहां 3.5 करोड़ के सीएसआर फंड और ग्रामीणों द्वारा जुटाए गए 1.5 करोड़ के चंदे (कुल 5 करोड़) से ‘व्हाइट हाउस’ जैसी भव्य इमारत तैयार की गई है।

इमारत के साथ-साथ यहां पढ़ाई के तरीके भी बदले गए हैं:

  • मिशन आरंभ और आधुनिक कक्षाएं: 1 जुलाई से सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक सामान्य ज्ञान की कक्षाएं चलती हैं। बच्चों के लिए रोज अखबार पढ़ना, भाषण देना और पढ़ी हुई किताबों का सारांश लिखना अनिवार्य है।
  • जिज्ञासा बॉक्स: हर शनिवार को छात्रों के सवालों के जवाब देने के लिए विशेष क्लास लगती है, जिसके लिए एक प्रश्न बॉक्स रखा गया है।
  • अनुपस्थिति पर अनोखी पहल: छुट्टी से लौटने वाले छात्रों से पूछा जाता है कि वे अनुपस्थिति के दौरान किससे मिले और उन्होंने क्या नया सीखा।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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