अभिजीत दिपके ने 48 घंटे में CEC ज्ञानेश कुमार का मांगा इस्तीफा, कहा- जंतर-मंतर 2.0 के लिए रहो तैयार

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की मांग तेज होती जा रही है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अनुचित चुनाव कराने के लिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की है. अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी CEC के खिलाफ मैदान में आ गया है. CJP का कहना है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त अगर 48 घंटों में इस्तीफा नहीं देते हैं तो जंतर-मंतर 2.0 निश्चित रूप किया जाएगा.

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आज गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने 48 घंटे के भीतर अपना इस्तीफा नहीं दिया, तो देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे. अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो जंतर-मंतर 2.0 निश्चित रूप से होगा.

ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े गद्दारः दिपके

दिपके ने कहा, “कल चुनाव आयोग के बारे में जो रिपोर्ट सामने आई, उससे यही साबित होता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े गद्दार हैं. वह देश के सबसे बड़े देश-विरोधी हैं और उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा, “ज्ञानेश कुमार देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं. क्या यही लोकतंत्र है? कुल मिलाकर, 13 करोड़ से अधिक वोट हटा दिए गए हैं. यह कोई छोटी-मोटी संख्या नहीं है.”

इतने सारे वोट हटाने की क्या जरुरतः दिपके

दिपके ने पिछले लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, “2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ताधारी पार्टी (NDA) के बीच का हार-जीत का अंतर सिर्फ 2% वोटों का था. 13 करोड़ वोट हटाना कुल वोटों का करीब 13% से 14% हटाने के बराबर है. क्या ज्ञानेश कुमार जानबूझकर उस 2% के अंतर को बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं ताकि वे कभी सत्ता से न हटें? ऐसा क्यों किया जा रहा है? इतने सारे वोट हटाने की क्या जरूरत थी?.”

उन्होंने अपने दावे में आगे कहा, “भारतीय जनता पार्टी (BJP) 2024 के चुनाव में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही थी. जब वे बहुमत से पीछे रह गए तो घबराहट फैल गई. उन्हें तब एहसास हुआ कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें बहुत मजबूती से उभर रही हैं, चाहे वह महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) हो, स्टालिन, पिनाराई विजयन, अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी हों. इन मुख्यमंत्रियों को एक-एक करके निशाना बनाया गया और उन्हें हराया गया.”

विपक्षी नेताओं को खत्म करने की साजिशः दिपके

दिपके का कहना है कि यह महज इत्तेफाक नहीं हो सकता. इसके पीछे एक साफ पैटर्न है. पश्चिम बंगाल में, ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र से 50,000 वोट हटा दिए गए और वह करीब 15,000 वोटों के अंतर से हार गईं. तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के चुनाव क्षेत्र में 1 लाख वोट डिलीट कर दिए गए और वह करीब 45,000 वोटों से हार गए. इसी तरह दिल्ली में, अरविंद केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र से 40 हजार से अधिक वोट डिलीट किए गए और वह 4,000-5,000 वोटों के अंतर से हार गए.

उन्होंने कहा, केरल में पिनाराई विजयन जीत सकते थे, लेकिन वोट डिलीट किए जाने की वजह से वह फिर से मुख्यमंत्री नहीं बन पाए. क्या यह सब प्रक्रिया सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था? “अब, विपक्ष या किसी खास पार्टी के प्रति हमारा कोई खास लगाव नहीं है. लेकिन लोकतंत्र में, अगर आप पूरे विपक्ष को ही खत्म कर दें, तो क्या उसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? क्या यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है?”

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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