मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत-ईरान में बातचीत, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों पर चर्चा

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच अहम कूटनीतिक बातचीत हुई है। इस बातचीत में समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार की ओर से गुरुवार को इसकी जानकारी दी गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत हो चुकी है, जिसमें क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और उससे जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हालिया बातचीत में खास तौर पर समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े विषयों पर फोकस किया गया। हालांकि उन्होंने कहा कि इस बातचीत के बारे में विस्तृत जानकारी फिलहाल साझा करना उचित नहीं होगा।
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग मार्गों की सुरक्षा अहम मुद्दा बन गया है।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने मौजूदा संकट को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति के रास्ते पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बहाल करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार ईरान में करीब नौ हजार भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें छात्र, नाविक, कारोबारी, पेशेवर और तीर्थयात्री शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि तेहरान से कई भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।
जो भारतीय नागरिक ईरान छोड़ना चाहते हैं, उनकी मदद अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते बाहर निकलने में की जा रही है ताकि वे वहां से उड़ान के जरिए भारत लौट सकें। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।











