छत्तीसगढ़ में ‘नकली पनीर’ पर बड़ा प्रहार: कल से एनालॉग पनीर बैन, स्वास्थ्य मंत्री बोले—‘सेहत से खिलवाड़ नहीं चलेगा’

रायपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में कल से एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मिलावटी और नकली खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बाजार में बड़ी मात्रा में ऐसा एनालॉग पनीर बेचा जा रहा था, जो दूध से नहीं बल्कि वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य कृत्रिम पदार्थों से तैयार किया जाता है। कई कारोबारी इसे सामान्य पनीर बताकर उपभोक्ताओं को बेच रहे थे, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी को देखते हुए सरकार ने इसकी बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कल से पूरे प्रदेश में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, डेयरी, मिठाई दुकानों और थोक विक्रेताओं की सघन जांच होगी। जहां भी प्रतिबंधित एनालॉग पनीर की बिक्री या उपभोक्ताओं को गुमराह करने की शिकायत मिलेगी, वहां तत्काल जब्ती, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई और संबंधित कानूनों के तहत प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कोरबा समेत कई जिलों में मिलावटी पनीर, नकली खोवा, सिंथेटिक दूध और अन्य खाद्य पदार्थों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों से संदिग्ध पनीर के नमूने लिए गए, बड़ी मात्रा में नकली और घटिया गुणवत्ता का पनीर जब्त किया गया और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी शुरू की गई।
सरकार का कहना है कि एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध का उद्देश्य उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस फैसले से खाद्य कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और मिलावटखोरों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। अब प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी कि प्रतिबंध का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।











