बीजापुर एनकाउंटर…बुच्चन्ना और पापाराव की पत्नी समेत 6 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नेशनल पार्क एरिया में 11 नवंबर को हुए मुठभेड़ में 3 महिला समेत 6 नक्सली मारे गए। इनमें 2 शवों की पहचान हुई है। जिसमें मद्देड़ एरिया कमेटी का इंचार्ज बुच्चन्ना और दूसरे शीर्ष नक्सल लीडर पापाराव की पत्नी उर्मिला भी शामिल है। लेकिन पापा राव इस बार भी जान बचाकर भागने में कामयाब रहा।
ऑपरेशन की सफलता के बाद नक्सलियों के शवों को जिला मुख्यालय लाया गया। वीडियो में DRG के जवान नक्सलियों के शव ढोकर लाते दिखाई दिए। 4 शवों का पहचान होना बाका है। इस मामले को लेकर बस्तर IG सुंदरराज पी आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
वहीं, टीम बीजापुर मुख्यालय से 55 किमी दूर कर्रेगुट्टा पहाड़ पर पहुंची। 60 किमी लंबे, 25 किमी चौड़े और समुद्र तल से 800 से 1100 मीटर ऊंचाई पर मौजूद जंगल में जगह-जगह पर लैंड माइंस बिछी हैं। फोर्स जंगल में जाने से सभी को रोकती है।
आला अफसरों का कहना है कि, अब नक्सल की कमान थिप्परी तिरुपति ऊर्फ देवजी और मांडवी हिड़मा के पास है। ये भेष बदलकर इसी जंगल में छिपे हुए हैं। जिस दिन ये दोनों मारे गए, उस दिन छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा।
3 दिन चला ऑपरेशन, 20 नक्सलियों की मौजूदगी थी
दरअसल, करीब 3 दिनों तक नेशनल पार्क एरिया में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का ऑपरेशन चला था। बीजापुर में मिशन-2026 का ये सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है। 20 नक्सलियों की मौजूदगी की पुष्टि के बाद फोर्स ने घेरा था। 11 नवंबर को 6 नक्सलियों को मार गिराया था।
3 जगह की एरिया कमेटी खाली
भैरमगढ़ एरिया कमेटी का इंचार्ज कमलू के सरेंडर करने से ये एरिया खाली हो गया। गंगालूर एरिया कमेटी का इंचार्ज दिनेश मोढियम के सरेंडर करने से ये एरिया भी खाली हो गया। अब मद्देड़ का इंचार्ज बुच्चन्ना मारा गया। इससे तीनों एरिया कमेटी खाली हो गया है। बताया जा रहा है जिले में अब बस 1-2 एरिया ही बचे है। जहां नक्सली मौजूद है।
नक्सली संगठन का फॉर्मेट– 54 में से सिर्फ 10 टॉप नक्सली ही बचे
नक्सली संगठन का भी अपना एक फॉर्मेट है। इसमें सबसे ऊपर पोलित ब्यूरो होता है। उनके नीचे सेंट्रल कमेटी और उनके नीचे जोन और डिवीजन होते हैं। 10 महीने में चल रहे ऑपरेशन से नक्सली अब केवल बीजापुर की तरफ ही सिमटकर रह गए हैं।
पोलित ब्यूरो में सिर्फ 3 नक्सली ही
1. थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (65), 1.5 करोड़ का इनामी। तेलंगाना, छत्तीसगढ़ में सक्रिय।
2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (70), 1.5 करोड़ का इनामी। माढ़ में सक्रिय, बीमार है।
3. मिशिर बेसरा (63), झारखंड में सक्रिय।
सेंट्रल कमेटी के 7 मेंबर बचे, सभी 1 करोड़ के इनामी
- मांडवी हिड़मा।
- सुधाकर उर्फ सिंहाचलम।
- मज्जीदेव उर्फ रामधीर।
- पसुनुरी नरहरि उर्फ विश्वनाथ।
- मल्ला राजीरेड्डी उर्फ संग्राम।
- अनल दादा उर्फ पशिराम मांझी।
- सहदेव उर्फ अनुज।
बीजापुर एसपी डॉ जितेंद्र यादव ने बताया कि, फोर्स के टार्गेट में नक्सली लीडर्स हैं। देवजी, हिड़मा को लेकर भी इनपुट्स हैं। अब इनके पास जान बचाने के लिए सरेंडर का ही विकल्प है। जो भी बीच में आएगा, वह मारा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों का दावा– देवजी-हिड़मा हथियार नहीं डालेंगे
इंटेलिजेंस अफसर और सरेंडर नक्सलियों ने बताया कि, जब से कर्रेगुट्टा में ऑपरेशन चल रहा है, तब से देवजी और हिड़मा इसी की पहाड़ियों-जंगल में छिप गए हैं। बिना वर्दी-हथियार के, जिससे पहचाने न जाएं, क्योंकि पुलिस के पास इनकी लेटेस्ट फोटो नहीं है। उन्होंने इसी जंगल में गोला-बारूद छिपा रखा है।
तेलंगाना कमेटी के सदस्य भी यहीं रहते हैं। नक्सली जंगलों में 31 मार्च 2026 की डेडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है इसके बाद ऑपरेशन बंद हो जाएगा। फिर ये संगठन को मजबूत करने में सक्रिय होंगे।
पुलिस के उच्च अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि, देवजी-हिड़मा हरगिज सरेंडर नहीं करेंगे, अंत तक लड़ेंगे। अगर, इन्होंने सरेंडर कर दिया तो भूपति, रूपेश जैसे इन्हें भी गद्दार कहा जाएगा।
छत्तीसगढ़ की तरफ जंगल, तेलंगाना में पठार
टीम बीजापुर से 34 किमी दूर आवापल्ली पहुंची। वहां से 11 किमी दूर उसूर चौकी पर पहुंचे। यहां सड़क खत्म हो जाती है। इसके बाद पथरीली पगडड़ियों का रास्ता आगे की ओर जाता है। आगे पैदल चलने के बाद कर्रेगुट्टा का घनघोर जंगल शुरू हुआ। बीच में कई जगह पानी के रपटे मिले। कहीं तो ऐसे रास्ते थे कि उन्हें पार करके जाना एक चुनौती थी।
साथ में गए पुलिसवालों ने बताया कि, यहां पर भी नक्सली लैंड माइंस बिछाकर रखते हैं। पहाड़ में थोड़ी दूर तक ही छत्तीसगढ़ की सीमा है, उसके आगे तेलंगाना लग जाता है। छत्तीसगढ़ की तरफ बड़े-बड़े पेड़ हैं, जबकि तेलंगाना में पठार हैं। यही वजह है कि नक्सलियों के लिए सेफ तेलंगाना वाला इलाका रहता है। लेकिन वे खाने-पीने की तलाश में छत्तीसगढ़ की तरफ आते हैं।
जंगल के अंदर एक पतली सी पगडंडी नजर आई। पुलिस वालों ने बताया कि नक्सलियों के मूमेंट की वजह से ये रास्ता बना है। कर्रेगुट्टा में बड़ी-बड़ी गुफाएं हैं जो 3-4 दशकों से नक्सलियों का सेल्टर रही हैं। जंगल तेलंगाना, आंध्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ती हैं। यही वजह है कि नक्सलियों का सेफ जोन है।











