छत्तीसगढ़ ने बनाया नया कानून, सरकार बोली- निवेश बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 पास कर दिया। सरकार का दावा है कि ऐसा कानून बनाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा।
सरकार का कहना है कि इससे कारोबार शुरू करना आसान होगा, निवेश बढ़ेगा और लालफीताशाही कम होगी। वहीं, कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि बिल बिना पर्याप्त चर्चा के जल्दबाजी में लाया गया है।
मंत्री लखनलाल देवांगन ने पेश किया
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 पेश किया। चर्चा के बाद कुछ संशोधनों के साथ इसे सदन ने मंजूरी दे दी।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह कानून आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से भविष्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नौकरियां कम हो सकती हैं। ऐसे में निवेश बढ़ाकर नए उद्योग लगाने और रोजगार पैदा करने पर जोर देना जरूरी है।
चंद्राकर ने कहा कि, यह कानून लालफीताशाही खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने सुझाव दिया कि नियम बनने के बाद सरकार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और उद्योग जगत के लोगों के लिए एक बड़ा सेमिनार आयोजित करे।
उन्होंने यह भी कहा कि समिति में मुख्य सचिव के पद के लिए ‘कन्वीनर की जगह मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO)’ या ‘सचिव’ शब्द इस्तेमाल किया जाए। सरकार ने यह सुझाव मान लिया।
कांग्रेस ने बिल का विरोध किया
वहीं कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार इसे बिना पर्याप्त चर्चा और सलाह-मशविरा किए लेकर आई है। उनका कहना था कि इससे कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा और उद्यमियों को खास फायदा नहीं मिलेगा।
बहस का जवाब देते हुए मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि सरकार अलग-अलग विभागों में छोटे-छोटे बदलाव करने के बजाय एक ऐसा कानून लाई है, जिससे सभी विभागों में एक साथ सुधार लागू किए जा सकें। इससे कारोबारियों का समय बचेगा और सरकारी कामकाज भी तेज होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार पूरे प्रदेश में सेमिनार आयोजित कर लोगों और उद्योग जगत को इस कानून की जानकारी देगी। साथ ही सेवाओं की सूची में बदलाव के लिए हर बार नया कानून लाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव कर सकेगी।
सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य होगा।
कानून से क्या बदलेगा
सरकार के मुताबिक, कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया पहले से आसान होगी। छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारों को कम कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी। कई मामलों में सरकारी निरीक्षण की जगह सेल्फ सर्टिफिकेशन या किसी अधिकृत विशेषज्ञ का प्रमाणपत्र ही पर्याप्त होगा।
बड़े उद्योगों को तय समय सीमा के भीतर मंजूरी नहीं मिलने पर डीम्ड अप्रूवल यानी स्वत: अनुमति मिलने का प्रावधान होगा। कारोबारियों को हर साल लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण कराने की जरूरत भी कम होगी।
इस कानून के तहत आठ विभागों की 43 सेवाओं को नई और आसान व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश के 15 लाख से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) को फायदा मिलेगा।











