बस्तर गोंचा में हादसा, रथ के नीचे आने से महिला घायल, हाथ में गंभीर चोट

बस्तर के प्रसिद्ध गोंचा पर्व के दौरान गुरुवार को जगदलपुर में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र की भव्य रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा के दौरान भीड़ के बीच एक महिला रथ के नीचे आ गई। महिला का एक हाथ रथ के पहिए के नीचे आ गया, जिससे वह घायल हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। मौके पर मौजूद पुलिस जवानों और श्रद्धालुओं ने महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि, महिला जगदलपुर के धरमपुरा इलाके की रहने वाली है। उनकी उम्र करीब 70 साल है। पुलिस के मुताबिक पहले उन्हें मेडिकल कॉलेज लेजाया गया था। जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। कोतवाली थाना प्रभारी लीलाधर राठौर ने कहा कि समय भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। रथ खींचने के दौरान हादसा हुआ। लेकिन पुलिस और श्रद्धालुओं की तत्परता से महिला को सुरक्षित निकाल लिया गया।

मंदिर से निकली थी रथ यात्रा

दरअसल, गुरुवार को आस्था, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सिरहासार भवन के सामने स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र की भव्य रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में जय जगन्नाथ के जयकारे लगाए गए। तुपकी से सलामी भी दी गई। हालांकि इस दौरान एक महिला हादसे का शिकार हो गई, जिसे समय रहते सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

22 देव विग्रहों को 3 रथों पर किया गया था विराजत

गोंचा पर्व के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र के कुल 22 देव विग्रहों को तीन अलग-अलग रथों में विराजित किया गया। पारंपरिक विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद रथयात्रा की शुरुआत हुई। यह यात्रा जगन्नाथ मंदिर से निकलकर गोलबाजार, दंतेश्वरी मंदिर चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई सिरहासार भवन पहुंची, जिसे जनकपुरी के रूप में सजाया गया है। यहां भगवान के विग्रहों को स्थापित किया जाएगा। रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में रथ खींचने पहुंचे थे। भगवान के दर्शन और रथ को स्पर्श करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और जयकारों के बीच रथ आगे बढ़ता रहा।

तुपकी से दी गई सलामी

गोंचा पर्व की सबसे खास परंपरा तुपकी सलामी भी इस दौरान निभाई गई। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान भक्तों ने बांस से बनी पारंपरिक तुपकी से भगवान को सलामी दी। सदियों पुरानी यह परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है और हर साल बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचते हैं। इसी बीच रथयात्रा के दौरान एक महिला घायल हो गई।

619 साल पुरानी है परंपरा

गोंचा पर्व की परंपरा करीब 619 साल पुरानी बताई जाती है। मान्यता है कि बस्तर के तत्कालीन राजा पुरुषोत्तम देव पुरी के जगन्नाथ मंदिर दंडवत यात्रा कर पहुंचे थे। वहां उन्हें रथपति की उपाधि के साथ 16 पहियों वाला विशाल रथ भेंट किया गया था। बस्तर लौटने के दौरान रथ को लाना कठिन होने पर इसे तीन भागों में विभाजित किया गया। बाद में इन्हीं रथों का उपयोग बस्तर दशहरा और गोंचा पर्व में किया जाने लगा। तभी से बस्तर में गोंचा पर्व की परंपरा शुरू हुई।

29 जून से शुरू हुआ पर्व

इस साल गोंचा पर्व की शुरुआत 29 जून को देव स्नान पूर्णिमा के साथ हुई थी। इसके बाद भगवान अनसर काल में रहे और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहे। 15 जुलाई को नेत्रोत्सव के बाद भगवान ने भक्तों को दर्शन दिए और 16 जुलाई को पारंपरिक रथयात्रा निकाली गई।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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