महाराष्ट्र निकाय चुनाव में सीट बंटवारे पर घमासान, कई शहरों में गठबंधन की तस्वीर अब भी साफ नहीं

महाराष्ट्र में महानगरपालिका और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन कई शहरों में सीट बंटवारे को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। अमरावती, नासिक, मालेगांव, धुळे, नागपुर, सोलापुर, जलगांव, छत्रपती संभाजीनगर और कल्याण-डोंबिवली जैसे प्रमुख शहरों में दलों के बीच खींचतान जारी है।
अमरावती में कांग्रेस और शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के बीच गठबंधन के संकेत मिले हैं। दोनों दलों के नेताओं के बीच बैठक हुई है और जल्द ही गठबंधन की औपचारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर महायुति की बैठक अमरावती से नागपुर स्थानांतरित कर दी गई है, जहां भाजपा, शिंदे गुट और अन्य सहयोगी सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
नासिक में भी महायुति के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कुल 122 सीटों में से भाजपा ने 85 सीटों की मांग रखी है, जबकि शिंदे गुट और अजित पवार गुट भी अपने-अपने दावे कर रहे हैं। इस मुद्दे पर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होने की बात कही जा रही है।
मालेगांव में गठबंधन की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण नामांकन प्रक्रिया धीमी चल रही है। उम्मीदवार दस्तावेजों की जटिलता और गठबंधन को लेकर अनिश्चितता के चलते सतर्कता बरत रहे हैं। वहीं धुळे में नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आने से हलचल तेज हो गई है।
सोलापुर में शिंदे गुट और अजित पवार गुट ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जबकि भाजपा के अलग चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। दोनों दलों के बीच सीटों का फॉर्मूला तय हो चुका है। इसी बीच शरद पवार गुट ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है, जिसमें छह नामों की घोषणा की गई है।
जलगांव और छत्रपती संभाजीनगर में भी भाजपा और शिवसेना के बीच सीट बंटवारे पर पेंच फंसा हुआ है। कल्याण-डोंबिवली में सीट बंटवारे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी सामने आई है और 50-50 के फार्मूले की मांग उठी है।
कुल मिलाकर महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले कई जगहों पर गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन राजनीतिक समीकरणों पर अंतिम फैसला होने की संभावना है, जिससे चुनावी तस्वीर साफ हो सकेगी।











