बिलासपुर रेल हादसे को लेकर कांग्रेस का जीएम ऑफिस घेराव

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रेलवे के जीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ता पहले रामलीला मैदान में एकत्र हुए और वहां सभा करने के बाद पैदल मार्च करते हुए जीएम ऑफिस पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रेलवे हादसे की जिम्मेदारी तय करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश कर रहा है।

कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये, घायलों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और आश्रितों को नौकरी देने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि कई परिवार इस हादसे से तबाह हो चुके हैं, लेकिन रेलवे उनसे संवाद करने के बजाय दरवाजे बंद कर रहा है।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। गुस्साए कांग्रेसी जीएम ऑफिस के मुख्य गेट पर चढ़कर नारेबाजी करते रहे। हालात संभालने के लिए भारी पुलिस बल और आरपीएफ की तैनाती करनी पड़ी। सुरक्षा कारणों से ऑफिस का मुख्य द्वार अंदर से बंद कर दिया गया। कांग्रेस प्रतिनिधियों ने रेलवे अधिकारी समीरकांत माथुर को ज्ञापन सौंपा और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि रेल हादसे में घायल एक मासूम बच्चे का मामला भी गंभीर है, लेकिन रेलवे इसे नजरअंदाज कर रहा है। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर अमानवीयता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जांच रिपोर्ट समय पर सार्वजनिक नहीं की गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

हादसे की जांच में सामने आया है कि पैसेंजर मेमू ट्रेन ने खतरे का सिग्नल पार कर दिया था, जिससे आगे खड़ी मालगाड़ी से उसकी सीधी टक्कर हुई। लोको पायलट विद्या सागर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सहायक लोको पायलट रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं। शुरुआती रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि लोको पायलट प्रमोशन से पहले साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल हुए थे, फिर भी उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी गई थी।

कांग्रेस का कहना है कि रेलवे अवॉर्ड लेने में आगे रहता है, लेकिन दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते समय मौन हो जाता है। प्रदर्शन में विधायक दिलीप लहरिया, जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय पाण्डेय सहित कई नेता मौजूद रहे।