‘चिकन नेक’ पर मंडराता खतरा, 78 साल पुरानी भूल को सुधारना जरूरी… सद्गुरु ने चेताया

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भारत के ‘चिकन नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने इसे देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जोड़कर देखा है. बेंगलुरु में ‘चिकन नेक’ के मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में सद्गुरु ने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के बंटवारे से उपजी 78 साल पुरानी एक ऐसी भूल है, जिसे 1971 में ही ठीक कर देना चाहिए था. उस समय इसे ठीक नहीं किया गया. मगर अब इसे सुधारने का समय आ गया है.

‘चिकन नेक’ का विस्तार जरूरीसद्गुरु ने आगे कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने के लिए इस संकरे रास्ते (चिकन नेक) का विस्तार करना जरूरी है. इसे चौड़े करने की दरकार है. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में जिस तरह से कट्टरता बढ़ रही है, उस लिहाज से इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है. सद्गुरु ने कहा कि बिना सीमाओं वाली दुनिया एक ख्वाहिश है.

‘जो भी जरूरी हो, हमें करना चाहिए’

सद्गुरु ने कहा कि यह बहुत अच्छा होता अगर दुनिया में कोई देश नहीं होते, दुनिया में कोई सीमाएं नहीं होतीं लेकिन हम अभी भी उसी लेवल पर हैं. अचानक हम यह कल्पना नहीं कर सकते कि कल हम सबको गले लगाएंगे और बहुत अच्छे से रहेंगे. अभी यह सोचना बेवकूफी होगी. उन्होंने कहा कि कमजोरी किसी राष्ट्र की नींव नहीं हो सकती. इसे हाथी की तरह मजबूत बनना होगा. जो भी जरूरी हो, हमें करना चाहिए. सद्गुरु ने ये भी कहा कि हम जो भी करने की कोशिश करते हैं, उसकी कीमत चुकानी पड़ती है.

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक ने कहा कि वैसे यह भूल 78 साल पहले हुई थी. कुछ सुधार की जरूरत है. सुधार होना ही चाहिए. मुझे लगता है कि हमें मुर्गी को अच्छे से खिलाना चाहिए और उसे हाथी बना देना चाहिए. हाथी की गर्दन को संभालना आसान होगा.

‘राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के लिए एकजुट हों’

सद्गुरु ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में भारत को अपनी सीमाओं के पास हो रहे इन अत्याचारों पर मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए. सद्गुरु ने कहा कि अगर हम आज सतर्क नहीं हुए, तो इतिहास खुद को दोहरा सकता है इसलिए राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के लिए एकजुट हों.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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