बांग्लादेश में पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की हिरासत में मौत, चुनाव से पहले उठे गंभीर सवाल

बांग्लादेश के वरिष्ठ हिंदू नेता और पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की जेल में मौत के बाद देश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ गई है। 85 वर्षीय सेन लंबे समय से बीमार थे और हिरासत में उचित इलाज न मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
रमेश चंद्र सेन बांग्लादेश के पूर्व जल संसाधन मंत्री और पांच बार सांसद रह चुके थे। वे अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रेसिडियम सदस्य भी थे। उनकी पहचान एक ईमानदार और मददगार नेता के रूप में थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिनाजपुर जिला जेल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि जेल में रहते हुए उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी।
देश में आगामी चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं के बीच एक प्रमुख हिंदू नेता की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से सरकार और प्रशासन की भूमिका पर बहस तेज हो सकती है।
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अवामी लीग के कई नेताओं पर मामले दर्ज किए गए थे। रमेश चंद्र सेन पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे और उन्हें उसी दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
सोशल मीडिया पर उनकी मौत को लेकर “कस्टोडियल किलिंग” के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि हिरासत में बीमार पड़ने के बाद अब तक कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हो चुकी है, जो चिंता का विषय है।
रमेश चंद्र सेन का जन्म 1940 में हुआ था और उन्होंने रंगपुर कारमाइकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने 1997 में पहली बार संसद में प्रवेश किया था और लंबे समय तक ठाकुरगांव-1 क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
सेन की मौत के बाद विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हिरासत में बंद नेताओं और कैदियों की सुरक्षा और इलाज सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इस घटना ने बांग्लादेश में कानून व्यवस्था, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिशोध को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।










