दिल्ली ब्लास्ट…भूपेश बोले- अमित शाह जिम्मेदारी लें या पद छोड़ें:विपक्ष की जासूसी कर रही एजेंसियां, विजय शर्मा-चंद्राकर ने कहा-इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए

दिल्ली ब्लास्ट की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जगदलपुर में कहा कि, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से गृह मंत्रालय नहीं संभल रहा है। इस घटना की वे जिम्मेदारी लें या फिर उन्हें छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि, आतंकवादियों को पकड़ने के लिए जिन एजेंसियों का काम होना चाहिए था, वो एजेंसियां विपक्ष के नेताओं की जासूसी कर रही है। पत्रकारों के पीछे पड़ी थी।
इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि, देश का व्यक्ति देश के अंदर ब्लास्ट नहीं करेगा। देश विरोधी संगठन और देश विरोधी ताकते जो देश के अंदर सक्रिय हैं। उनकी ही यह करतूत है। जो निंदनीय है। इसलिए इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। देश की सुरक्षा एजेंसियां इस पर जांच कर रही हैं। इसलिए हमें इंतजार करना चाहिए।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, पुलवामा में हमला हुआ। हमले के बाद जवाब भी दिया गया। 10 साल बाद विस्फोट की घटना हुई है। ऐसे में राजनीति नहीं करनी चाहिए। पहले स्थिति सामान्य होने दें, फिर सदन में चर्चा करें। अंतिम संस्कार तक नहीं हुआ और आपने राजनीति शुरू कर दी। यह राजनीति में निम्नता है। बता दें कि, दिल्ली ब्लास्ट में अब 12 लोगों की मौत हो चुकी है।
पुलवामा में सैकड़ों किलो RDX कहां से आया?
भूपेश बघेल ने कहा कि, दिल्ली ब्लास्ट में मौत के आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। उन्होंने सवाल खड़ा किया है कि पुलवामा में सैकड़ों किलो RDX कहां से आया? पहलगाम में आतंकी कैसे आए? वहां NSG उतारने की बजाय अमित शाह कैसे उतरे? ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह दावा था कि उन्होंने युद्ध रुकवाया था।
उन्होंने कहा कि, अब चुनाव को लेकर अमित शाह लगातार बिहार दौरे में थे। अमित शाह बिहार में CCTV कैमरा बंद करवा कर लोगों से मिल रहे थे। उधर देश की राजधानी में इतनी बड़ी घटना हो गई। भूपेश बघेल ने कहा कि, अब इस घटना की जिम्मेदारी तो उन्हें लेनी चाहिए। अमित शाह या तो चुनाव प्रचार कर लें या तो गृह मंत्रालय संभाल लें।
भाजपा सरकार में ज्यादा हुई नक्सल घटना
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि, 2014 से 2018 तक छत्तीसगढ़ में रमन सिंह CM थे। केंद्र में भी भाजपा की सरकार थी। तब नक्सल घटनाओं में बहुत इजाफा हुआ था। लेकिन जब हमारी सरकार आई तब हमने कई नीतियां बनाई। नक्सलवाद खत्म करने हमने संवाद बढ़ाए। समाज से, पत्रकारों से, फोर्स के लोगों से हमने बातचीत की थी।
15 नवंबर से धान खरीदी मुश्किल
भूपेश बघेल ने कहा कि, छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। सरकार ने निर्णय लिया है कि, 15 तारीख को हम धान खरीदी की शुरुआत करेंगे। आज 11 तारीख है। धान खरीदी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सभी हड़ताल पर हैं। अब तक किसी भी किसान को टोकन नहीं मिला है। इसका मतलब यह है कि यह सरकार 15 तारीख तक धान खरीदी शुरू नहीं कर पाएगी।
एक तरफ किसान चिंतित हैं। पूरे सीजन भर उन्हें पहले यूरिया नहीं मिला। बीमारी आई। दवाई पर बहुत खर्च हुआ। अब मनमाना बिजली का बिल आ रहा है। हड़ताल को देखकर लग रहा है कि सरकार 15 तारीख को धान खरीदी की शुरुआत नहीं कर पाएगी। यदि खरीदी नहीं होती है तो किसान बहुत परेशान होंगे।
SIR पर भी उठाए सवाल
उन्होंने SIR पर कहा कि, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध किया है। मतदाता सूची बनाने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। सूची का पुन-निरीक्षण किया जाता है। बिहार में आधार कार्ड को SIR के लिए आधार नहीं माना गया था। लोग सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आधार कार्ड को 12 नंबर का प्रमाण माना गया। जिससे मतदाता सूची में नाम जुड़वां पाएं।
बस्तर में बहुत से क्षेत्रों में नहीं हुई जनगणना
साल 2011 की जनगणना में बस्तर के बहुत से क्षेत्रों में जनगणना नहीं कर पाए थे। खास कर बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा के कई ऐसे इलाके हैं जहां जनगणना नहीं हो पाई थी, क्योंकि इलाका बेहद ही संवेदनशील है। वहां की जनता के पास आधार कार्ड, जॉब कार्ड या निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज नहीं हैं।
भूपेश बघेल का आरोप है कि रमन सिंह के कार्यकाल में स्कूल बंद थे। जब हमारी सरकार थी और हम बस्तर फाइटर की भर्ती करवा रहे थे तो अंदरूनी इलाके के पांचवीं और आठवीं पास बच्चे नहीं मिल पा रहे थे। अब उनके स्कूल का सर्टिफिकेट मांगेंगे तो वे कहां से लेकर आएंगे।
महिलाओं के कटेंगे नाम
हमें आशंका है कि बहुत सी महिलाओं के और आदिवासियों के नाम सूची से काटे जाएंगे। महिलाओं को इसलिए दिक्कत होगी क्योंकि माता-पिता के नाम का वोटर लिस्ट लाने को कहा जाएगा। बघेल ने कहा कि मान लीजिए कोई महिला कांकेर की रहने वाली है और उसका ससुराल दंतेवाड़ा में है, तो क्या वह महिला वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने कांकेर जाकर दस्तावेज लाएगी? बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम काटे जाने की आशंका है।










