निर्जला एकादशी पर तुलसी की मंजरी से करें ये महाउपाय, घर में कभी नहीं होगा दरिद्रता का वास!

निर्जला एकादशी सभी एकादशी व्रतों में अधिक पुण्यदायी मानी गई है. धार्मिक मान्यता है कि इस एक एकादशी व्रत को करने से सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल मिल जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने सभी एकादशी व्रतों का पुण्य पाने के लिए निर्जला एकादशी का व्रत रखा था. हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के दिन निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस साल 25 जून को इस एकादशी का व्रत रखा जाएगा.

निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखते हैं. यानी व्रत के दौरान पानी तक नहीं पीते हैं. मान्यता है कि निर्जला एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से आत्मा को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर बैकुंठ धाम चली जाती है. निर्जला एकदाशी के दिन पूजा पाठ और व्रत के साथ-साथ तुलसी की मंजरी से जुड़े कुछ अति विशेष उपाय भी किए जाते हैं. मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

निर्जला एकादशी पर तुलसी की मंजरी के महाउपाय

  • निर्जला एकादशी के दिन तुलसी की मंजरी को लाल कपड़े में बांधकर भगवान विष्णु को स्पर्श कराएं और तीजोरी में रख दें. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में कभी भी पैसे की कमी नहीं होती है.
  • इस दिन शाम के समय तुलसी की मंजरी दूध में डालकर भगवान विष्णु को चढ़ाएं. ऐसा करने से कर्ज से छुटकारा मिलता है. नए पैसे आने के स्रोत बनते हैं.
  • इस दिन तांबे के पात्र में गंगाजल लेकर उसमें तुलसी की मंजरी डालिये. फिर इस जल का छिड़काव घर में हर स्थान पर करें. ऐसा करने से घर की नकारात्मकता खत्म होती है और गरीबी दूर होती है.
  • इस दिन तुलसी के पौधे में लाल कलावा बांध दीजिये. ऐसा करने से घर का कलह-क्लेश दूर हो जाता है.

निर्जला एकादशी 2026 तिथि

  • द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर हो रही है.
  • इस तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 08 बजकर 09 मिनट पर होगा.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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