पूर्व माओवादी रुपेश का दावा: झीरम घाटी हमला राजनीतिक साजिश नहीं, जांच एजेंसियों को पहले से थी जानकारी

पूर्व माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य रुपेश उर्फ सतीश ने झीरम घाटी हमले की वास्तविक सच्चाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 2013 में बस्तर में हुए इस हमले के बारे में जांच एजेंसियों को पहले से जानकारी थी और यह हमला संगठन की रणनीतिक भूल का परिणाम था, न कि किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा। 25 मई 2013 को माओवादी हमले में कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और नंद कुमार पटेल सहित 30 से अधिक लोग मारे गए थे।
रुपेश के अनुसार, घटना के समय वे मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन भाकपा (माओवादी) की पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति की बैठकों में इस हमले को संगठन की बड़ी रणनीतिक भूल के रूप में स्वीकार किया गया। पार्टी ने इस संबंध में पत्र जारी कर अपनी गलती सार्वजनिक रूप से भी मानी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि झीरम हमला किसी राजनीतिक साजिश के तहत नहीं हुआ, बल्कि टीसीओसी (टैक्टिकल काउंटर आफेंसिव कैंपेन) के तहत सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की योजना थी, लेकिन दुर्भाग्यवश कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा इसकी चपेट में आ गई।
रुपेश ने बताया कि हमले का नेतृत्व कर रहे माओवादी कैडर में राजनीतिक समझ का अभाव था और सूचना तंत्र भी कमजोर था। इसी कारण नंद कुमार पटेल और उदय मुदलियार जैसे नेता मारे गए। उन्होंने कहा कि 35 साल का भूमिगत जीवन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का कोई मलाल नहीं है, क्योंकि बदलते दौर में सशस्त्र संघर्ष का औचित्य समाप्त हो गया।
उन्होंने माओवादी हिंसा में हुए बलिदान और जनअदालतों के फैसलों का भी बचाव किया। साथ ही कहा कि संगठन ने कभी बड़े पूंजीपतियों से पैसा नहीं लिया और हथियार मुख्यतः देश में बने थे। स्कूलों और अस्पतालों के नुकसान के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह संगठन की नीति का हिस्सा नहीं था, बल्कि सुरक्षा बलों की गतिविधियों के कारण हुआ।
रुपेश ने स्वीकार किया कि माओवादी विचारधारा समय के साथ अपडेट नहीं हुई और आंदोलन सीमित दायरे में सिमट गया। उन्होंने ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर मतांतरण और संगठन के भीतर हुई राजनीतिक गलतियों पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि झीरम हमले को रणनीतिक भूल माना गया, लेकिन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई।
रुपेश ने यह भी बताया कि शीर्ष माओवादी देवजी संघर्ष जारी रखने के पक्ष में हैं और इसलिए उन्होंने समर्पण नहीं किया।









