तुषार मेहता, मुकुल रोहतगी से लेकर शरण देव सिंह तक… मेधा रूपम के लिए सुप्रीम कोर्ट में उतरी वकीलों की फौज

सुप्रीम कोर्ट में 23 सितंबर को हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई हुई. मामला ‘मेधा रूपम बनाम आकृति चौधरी और अन्य’ का था. इस केस की सबसे खास बात यह रही कि याचिकाकर्ता मेधा रूपम को राहत दिलाने के लिए देश के सबसे बड़े और दिग्गज वकीलों की एक पूरी फौज अदालत में खड़ी नजर आई. इनमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी शामिल थे.
इनके अलावा मेधा रूपम की ओर से सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल शरण देव सिंह ठाकुर, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) रुचिरा गोयल, विभव मिश्रा, ऋषिका ऋषभ, शरण्या, केशव सहगल, कृति बल्लाल और ईशा शर्मा भी पेश हुए. दूसरी तरफ प्रतिवादी नंबर-1 आकृति चौधरी की तरफ से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विस ने पक्ष रखा. उनके साथ वकील माणिक गुप्ता और AOR पूजा शर्मा भी मौजूद थीं. गोंजाल्विस ने मामले में पहले से कैविएट दाखिल कर रखी थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने की. यह बेंच कोर्ट नंबर 16 में बैठी थी. मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी पर लगा NSA रद्द करने और मेधा रूपम पर 5 लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मेधा रूपम की याचिका पर आगे सुनवाई की अनुमति दी और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया. रेस्पोंडेंट नंबर 2 और 3 को उनके स्टैंडिंग काउंसिल यानी सरकारी वकीलों के जरिए भी नोटिस देने का निर्देश दिया गया. इस मामले में कुल 6 रेस्पोंडेंट हैं. आकृति चौधरी, केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर, पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक.
हाईकोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 27 से 33 पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक मामले की मेरिट यानी पूरे मामले के गुण-दोष पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27 से 33 के अमल पर रोक रहेगी. सुनवाई के दौरान कॉलिन गोंजाल्विस ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को होगी.
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