गोंदिया रेलवे ट्रैक मर्डर मिस्ट्री: उज्जैन से गिरफ्तार प्रेमी, चरित्र पर शक में की थी प्रेमिका की हत्या

गोंदिया शहर से सटे सूर्याटोला रेलवे चौकी परिसर में दोनों रेलवे ट्रैक के बीच में 22 जून की सुबह एक महिला की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या के रहस्यमय मामले को रामनगर पुलिस ने सुलझा लिया है। इस मामले में मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बैसलखुर्द से बीरेंद्र आसाराम परमार (34) को गिरफ्तार किया गया है।
मृतक महिला की पहचान सालेकसा तहसील के दुर्गुटोला निवासी शालू जोशीराम नंदेश्वर (38) के रूप में की गई है। शालू नंदेश्वर ने पहले इंदौर के एक व्यक्ति से शादी की थी। सात माह पहले उसके पति की मौत हो गई।
वह पिछले डेढ़ साल से बीरेंद्र परमार के साथ रिलेशनशिप में थी। पुलिस जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, बीरेंद्र को शक था कि शालू का किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध है।
अवैध संबंध के शक में पत्नी की गला रेतकर हत्या
इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर बहस होती रहती थी। एक माह पहले उसने गुस्से में आकर शालू की नाक भी काट दी थी। लेकिन उसके बाद भी उसके रिश्ते का शक बरकरार रहने पर बीरेंद्र ने उसे मारने की साजिश रची।
15 दिन पहले शालू अपने मायके सालेकसा तहसील के दुर्गटोला आई थी। इसी बीच बीरेंद्र भी इंदौर से ट्रेन से सालेकसा पहुंचा। उसने फोन कर शालू को सालेकसा रेलवे स्टेशन पर बुलाया। शालू का भाई उसे मोटरसाइकिल से स्टेशन पर छोड़ गया। इसके बाद दोनों लोकल ट्रेन से गोंदिया के लिए रवाना हो गए।
रविवार रात गोंदिया के पास सिग्नल के कारण ट्रेन रुकने पर दोनों ततर गाए आरोपी ने बैग में लाए चाक से शालू की गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने इसे रेल दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को दो पटरियों के बीच छोड़ दिया।
रामनगर पुलिस ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और विभिन्न जांच करके मामले को सुलझाया। शनिवार, 27 जून को आखिरकार बीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच पुलिस निरीक्षक प्रवीण बोरकुटे के मार्गदर्शन में चल रही है।
भाई ने कपड़ों से की बहन की पहचान
पहले तो हत्या की गई महिला की पहचान नहीं हो पाई थी। पुलिस ने मृत महिला के कपड़ों के साथ एक सर्च वारंट प्रसारित किया। शव की पहचान उसके भाई ने उन्हीं कपड़ों से की, जिनमें बहन को सालेकसा रेलवे स्टेशन पर छोड़ा गया था। इस पहचान ने जांच को एक निर्णायक दिशा दे दी।
ट्रेन बोगी के कैमरे में कैद
सालेकसा आते समय आरोपी बीरेंद्र परमार ने स्टेशन और क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों से खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी तस्वीर रेलवे बौगी के सीसीटीवी कैमरे में साफ कैद हो गई। इस अहम सबूत से पुलिस आरोपी तक पहुंच सकी।










