किराना दुकानदार की बेटी बनी DSP: इंटरव्यू में पूछा गया ‘गंगा ढाबा में क्या बदल गया?’

“इंटरव्यू में मुझसे पूछा गया कि जेएनयू कैंपस में क्या बदलाव आए हैं और गंगा ढाबा में पहले और अब क्या फर्क है। चूंकि मैं वहां पढ़ चुकी हूं, इसलिए मैंने विस्तार से जवाब दिया। पैनल मेरे उत्तरों से संतुष्ट नजर आया।”

मुजफ्फरपुर के गोबरसही चौक की रहने वाली जया आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। किराना दुकानदार की बेटी जया ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में लगातार तीन बार सफलता हासिल कर एक अनोखी मिसाल कायम की है। 70वीं बीपीएससी परीक्षा में उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पद के लिए हुआ है।

शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर से फिर JNU में की पढ़ाई

जया की सफलता का सफर साधारण परिवार से शुरू होकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा है। उनके पिता सुनील कुमार गोबरसही चौक पर किराना दुकान चलाते हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और यही वजह रही कि जया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई प्रभात तारा स्कूल और जैतपुर पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली जाकर फिजिक्स ऑनर्स से स्नातक किया और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2022 में उन्होंने पॉलिटिकल साइंस विषय में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) भी हासिल की।

तीन अटेम्प्ट…तीनों में सफल

दमिक क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य होने के बावजूद जया ने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि 67वीं बीपीएससी में उनका चयन रेवेन्यू ऑफिसर के रूप में हुआ। इसके बाद 68वीं बीपीएससी में वह सहायक निदेशक, बाल संरक्षण (ADCC) बनीं और अब 70वीं बीपीएससी में डीएसपी पद हासिल कर उन्होंने सफलता की नई इबारत लिख दी। खास बात यह रही कि 69वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने हिस्सा ही नहीं लिया था।

वर्तमान में समाज कल्याण विभाग में है कार्यरत

वर्तमान में जया सीतामढ़ी में समाज कल्याण विभाग में कार्यरत हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार पुलिस सेवा में जाने का सपना भी पूरा कर लिया। हालांकि उनका अंतिम लक्ष्य अभी भी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास करना है और वह इसके लिए अपनी तैयारी जारी रखेंगी।

इंटरव्यू में क्या कुछ पूछा, जानिए

इंटरव्यू के अनुभव साझा करते हुए जया बताती हैं कि लगातार तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचने और सफल होने के कारण इस प्रक्रिया को लेकर उनका आत्मविश्वास पहले से मजबूत था। इस बार इंटरव्यू में जेएनयू के अनुभवों के अलावा समसामयिक विषयों पर भी सवाल पूछे गए।

हालांकि कुछ हालिया घटनाओं से जुड़े प्रश्नों का जवाब देने में उन्हें कठिनाई हुई। इस पर पैनल ने मुस्कुराते हुए कहा कि लगता है नौकरी मिलने के बाद अखबार पढ़ना कम कर दिया है। जया कहती हैं कि यह उनके लिए सीख थी और अब उन्होंने नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ना फिर से शुरू कर दिया है।

बीपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सलाह देते हुए जया कहती हैं कि उत्तर लेखन की आदत कभी नहीं छोड़नी चाहिए। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहराई से अध्ययन करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार प्रीलिम्स परीक्षा सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यदि प्रारंभिक परीक्षा निकल जाती है तो आगे की तैयारी के लिए आत्मविश्वास बढ़ जाता है। वहीं मुख्य परीक्षा के लिए निरंतर अभ्यास और इंटरव्यू के लिए आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार है।

महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर भी जया की स्पष्ट सोच है। उनका मानना है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई लड़कियों पर कम उम्र में शादी का दबाव बनाया जाता है। ऐसे में परिवारों को बेटियों की क्षमता को समझते हुए उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर देना चाहिए।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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