छत्तीसगढ़: प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा अवैध ईंट का कारोबार, शासन को भी राजस्व का लग रहा चूना

बलरामपुर: जिले में अवैध ईंट निर्माण का कारोबार प्रशासनिक ढिलाई के चलते खुलेआम संचालित हो रहा है. हैरानी की बात यह है कि पूर्व में बड़ी कार्रवाई और जप्ती के बाद भी अवैध भट्टे धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, कई स्थानों पर बिना वैध अनुमति के ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं. इन भट्टों में अवैध कोयले का उपयोग कर पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है. इससे न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि वन संपदा को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है. क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि धुएं और प्रदूषण से जनजीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में रघुनाथनगर क्षेत्र में प्रशासन द्वारा लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की ईंटें जप्त करने की कार्रवाई की गई थी. उस समय इसे बड़ी सफलता बताया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद पुनः अवैध निर्माण शुरू हो जाना प्रशासनिक सख्ती पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण और कड़ी कार्रवाई करें,तो इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सकती है। लेकिन अब तक की स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो निगरानी में भारी चूक है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता.
जिले में लगातार हो रही इस गतिविधि ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? क्या वन संपदा और पर्यावरण की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी, या प्रशासन वाकई इस अवैध कारोबार पर ठोस और स्थायी कार्रवाई करेगा?











