क्या बीजेपी छोड़ने वाले हैं अमरिंदर सिंह? चर्चाओं पर पूर्व CM ने ये कहकर लगाया विराम

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार (25 सितंबर) को अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों पर सफाई दी. उन्होंने लंबे अंतराल के बाद चुप्पी तोड़ते हुए कांग्रेस में वापसी की किसी भी संभावना को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि पंजाब को लेकर पार्टी नेतृत्व के सामने अपने विचार और भावनाएं रखना उनका कर्तव्य है. हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि वो बीजेपी छोड़ने जा रहे हैं. सिंह के इस बयान के बाद उनके कांग्रेस में लौटने की अटकलो पर विराम लग गया है.

मीडिया से बात करते गुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब चुनावों पर कहा ‘मैंने पंजाब की राजनीति में 60 साल बिताए हैं. मैं अकेला नहीं हूं, मेरे साथ और भी साथी हैं. हमने इतने सालों में पंजाब के हालात देखे हैं, लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्होंने हमसे पूछा तक नहीं. हम यहीं के रहने वाले हैं और उन्हें अपनी राय और भावनाएं बताना मेरा फ़र्ज़ है. मैंने यह नहीं कहा है कि कांग्रेस या बीजेपी में अब मेरी कोई अहमियत नहीं रही. पार्टियां बदलती रहती हैं. जब मैं कांग्रेस में था, तब ऑपरेशन ब्लू स्टार की वजह से अकाली दल में भी गया था और बाद में कांग्रेस में लौट आया था. इसका मतलब यह नहीं है कि अब मैं पार्टी छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाऊंगा.

‘मैं 84 साल का हूं, लेकिन अभी बूढ़े नहीं हुआ’

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह कठिन दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसके बारे में और विस्तार से नहीं बताया. सिंह ने कहा कि वो 84 साल के हैं लेकिन अभी बूढ़े नहीं हुए हैं, उन्होंने मोरारजी देसाई का उदाहरण दिया, जो बहुत अधिक उम्र में प्रधानमंत्री बने थे. उन्होंने कहा ‘मैं 84 साल का हूं, लेकिन मोरारजी देसाई भी 92 साल के थे’.

पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की किताब का विमोचन

दरअसल कैप्टन अमरिंदर सिंह पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की याद में प्रकाशित एक किताब ‘बिशन विद लव’ के विमोचन के कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद थे, जिन्होंने अमरिंदर सिंह को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनते देखने की कामना की और इसके लिए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं. पुस्तक विमोचन के अवसर पर जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उपस्थित थे, साथ ही पूर्व क्रिकेटर कपिल देव, सैयद किरमानी और मदन लाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘क्रिकेट सज्जनों का खेल है. यह एक ऐसा खेल है जिसे हमेशा बढ़ावा दिया जाना चाहिए. आज हमारे देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके बारे में डॉक्टर साहब मुझसे कहीं अधिक बता सकते हैं. लेकिन हम एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं, और हमें यहां लोगों की जरूरत है’.

‘मैंने पंजाब की राजनीति में 60 साल बिताए हैं’

उन्होंने मजाक में यह भी कहा ‘मैं पहले से ही मुसीबत में हूं, इसलिए मेरे बारे में चिंता मत करो’.बाद में, जब उनसे पूछा गया कि वो बीजेपी से क्यों नाराज हैं, तो उन्होंने कहा ‘मैंने पंजाब की राजनीति में 60 साल बिताए हैं. कुछ लोग हमारे बाद आए और उन्हें यहां आए हुए एक साल भी नहीं हुआ है. हमने इन सभी सावों में पंजाब की स्थिति देखी है, लेकिन उन्होंने हमसे पूछा तक नहीं’.

‘कांग्रेस में वापसी का कोई इरादा नहीं’

उन्होंने कहा ‘यह मेरा कर्तव्य है कि मैं उन्हें अपने विचार और भावनाएं बताऊं. मैंने यह नहीं कहा है कि मैं कांग्रेस या बीजेपी में अब प्रासंगिक नहीं हूं. पार्टियां बदलती रहती हैं. जब मैं कांग्रेस में था, तब मैंने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के दौरान अकाली दल में भी गया था और बाद में कांग्रेस में वापस आ गया था. इसका यह मतलब नहीं है कि मैं अब कांग्रेस छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाऊंगा, लेकिन यह मेरा कर्तव्य है कि मैं उन्हें (बीजेपी नेताओं को) अपने विचार और अपनी भावनाएं बताऊं’.

‘बीजेप में शामिल होने से कोई खास लाभ नहीं हुआ’

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बीजेप में शामिल होने के बाद उन्हें राजनीतिक रूप से कोई खास लाभ नहीं हुआ है और वो खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर मानते हैं. अमरिंदर सिंह की ये टिप्पणियां पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आई हैं. इस दिग्गज नेता ने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद 2021 में कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था. उनके जाने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था.

बीजेपी में शामिल हुए थे अमरिंदर सिंह

कांग्रेस से अलग होने के बाद अमरिंदर सिंह ने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाई, जिसे बाद में बीजेपी में विलय कर दिया गया. हालांकि, अब उन्होंने बीजेपी में अपनी भूमिका पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई.

पंजाब के राजनीतिक हलकों में उनके बयान पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टियों द्वारा अपनी-अपनी रणनीति बनाने के दौर में. इस बयान ने अमरिंदर सिंह के राजनीतिक भविष्य और राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है.

दरअसल पिछले काफी समय से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में दोबारा शामिल हो सकते हैं. पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनकी वापसी को काफी अहम माना जा रहा था, हालांकि अब उन्होंने तमाम अटकलों को विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि वो बीजेपी में ही रहेंगे और कांग्रेस में शामिल नहीं होंगे.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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