सांस की तरह जरूरी क्यों है सरकार, सुबह से लेकर शाम तक हमारे लिए करती क्या है?

आपकी सुबह की पहली चाय बनने से पहले ही सरकार आपके जीवन को कई बार छू चुकी होती है. सुबह उठिए, घड़ी देखिए. आपने जिस समय को देखा, वह समय भी पूरे देश के लिए सरकार ने तय किया हुआ है. कई दशक पहले तय किया गया यह समय आज हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. नल खोलिए… नल से आने वाला पानी साफ किया गया है, पंप किया गया है और उन पाइपों के रास्ते आपके घर तक पहुंचाया गया है, जिन्हें सरकारी संस्थाओं ने बनाया और संभाला है.

बिजली का स्विच दबाइए… आपके घर तक पहुंची बिजली तारों के एक बड़े जाल से होकर आती है, जिनमें से बहुत-सी तारों और व्यवस्थाओं को सरकारी बिजली कंपनियां संभालती हैं. घर से निकलने से पहले मौसम देखिए. हो सकता है आपने मौसम की जानकारी भारतीय मौसम विभाग से देखी हो. यानी एक सरकारी संस्था आपके लिए आसमान और मौसम पर नजर रख रही है, ताकि आपको खुद अनुमान न लगाना पड़े कि आज बारिश होगी या धूप निकलेगी.

सरकार की पूरी व्यवस्था पीछे खड़ी

घर से बाहर निकलते ही आपके पैरों के नीचे जो सड़क है, उसे किसी सरकारी विभाग ने बनाया होगा और उसकी मरम्मत भी किसी सरकारी विभाग ने की होगी. सड़क के किनारे लगा ट्रैफिक सिग्नल उन नियमों के हिसाब से चलता है, जिन्हें सरकार ने बनाया है. दुकान से कुछ खरीदते समय अगर आपने नकद पैसे दिए, तो आपके हाथ में जो नोट था, उसे भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी किया है. उस नोट की कीमत के पीछे सरकार की पूरी व्यवस्था खड़ी है.

इनमें से किसी काम के लिए आपको एक बार भी रुककर यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ी कि ‘सरकार यह सब कर रही है. और शायद यही सबसे बड़ी बात है. सरकार का सबसे बड़ा काम हमेशा वह नहीं होता जो खबरों में दिखाई देता है. उसका बड़ा हिस्सा उन छोटे-छोटे कामों में होता है जो इतनी चुपचाप और लगातार होते रहते हैं कि हमें याद ही नहीं रहता कि कोई इन्हें चला भी रहा है.

सरकार आखिर करती क्या है?

असल में तीन बड़े काम. पहला, वह नियम बनाती है. ऐसे कानून बनाती है जो बताते हैं कि क्या करना ठीक है और क्या नहीं. ताकि एक अरब से ज्यादा लोगों का देश किसी तरह बिना हर समय लड़ाई और अव्यवस्था के चल सके. पिछले लेख में हमने देखा था कि ये कानून संसद के जरिए कैसे बनते हैं.

दूसरा, सरकार सेवाएं चलाती है. स्कूल, अस्पताल, सड़कें, रेलवे, पुलिस, अदालतें, डाक व्यवस्था, पानी और कई राज्यों में बिजली. इन सबके लिए लोगों को योजना बनानी पड़ती है, इन्हें बनाना पड़ता है और फिर हर दिन, हर साल, लगातार चलाते रहना पड़ता है. असल में सरकार के बहुत से कर्मचारी अपना ज्यादातर समय इसी काम में लगाते हैं. केवल केंद्र सरकार में ही करीब 48 लाख कर्मचारी हैं. भारतीय रेलवे में 10 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. दुनिया में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने वाली संस्थाओं में भारतीय रेलवे भी एक है.

देश की सीमाओं की रक्षा

तीसरा, सरकार हमारी रक्षा करती है. सेना देश की सीमाओं की रक्षा करती है. पुलिस देश के अंदर व्यवस्था बनाए रखती है. जब दो लोग या दो पक्ष अपने बीच किसी विवाद को खुद नहीं सुलझा पाते, तो अदालत फैसला करती है. इनमें से कोई भी चीज ज्यादातर दिनों में हमारी सुबह दिखाई नहीं देती. और शायद यही इस बात का संकेत है कि व्यवस्था अपना काम कर रही है.

इन सब कामों के लिए सरकार को पैसे चाहिए. वह पैसा मुख्य रूप से टैक्स से आता है, जिसके बारे में हमने इस श्रृंखला के पहले दिन बात की थी. सरकार उस पैसे को ऊपर बताए गए तीन बड़े कामों पर खर्च करती है. और जब बाढ़ आती है, कोई बड़ी आपदा आती है, फसल खराब हो जाती है या लोगों के स्वास्थ्य पर कोई बड़ा संकट आता है, तब भी इसी व्यवस्था से मदद पहुंचाई जाती है.

आपकी पहली चाय से पहले क्या-क्या हो गया?

अब इस बात पर थोड़ा रुककर सोचिए. आज सुबह सरकार ने जो कुछ किया, उसमें से लगभग किसी एक काम के लिए भी आपको अपना फैसला देने की जरूरत नहीं पड़ी. आपने पानी साफ करने की व्यवस्था को मंजूरी नहीं दी. आपने सड़क की मरम्मत का बजट नहीं देखा. आपने नोट छापने की व्यवस्था की जांच नहीं की. फिर भी इन सब चीजों ने आपकी सुबह को छुआ, चुपचाप. आपकी पहली चाय से पहले ही.

हर कदम पर हमें मदद मिली

किसी दूसरे को अपने लिए इतने बड़े काम करने की जिम्मेदारी देना छोटी बात नहीं है. यह असल में उन सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है, जो हम हर दिन किसी और को सौंप देते हैं. और अक्सर बिना एक बार भी सोचे. यहीं से एक सीधा और जरूरी सवाल उठता है. यह गुस्से वाला सवाल नहीं है. अगर सरकार हमारे लिए इतना कुछ कर रही है, इतनी चुपचाप और लगातार कर रही है, तो हमें कितना पता है कि वह अपना काम कितनी अच्छी तरह कर रही है?

सिर्फ यह नहीं कि आपके शहर में क्या हो रहा है. बल्कि आपकी गली में क्या हो रहा है. आपके बच्चे के स्कूल में क्या हो रहा है. आपके अस्पताल में क्या हो रहा है. आपके घर तक आने वाले पानी में क्या हो रहा है. खास तौर पर आपके लिए क्या हो रहा है.

हममें से ज्यादातर लोग अपने घर का हिसाब जानते हैं. अपनी रसोई का, अपनी तनख्वाह का, अपने परिवार के खर्च का. कई लोग तो आखिरी रुपए तक का हिसाब रखते हैं. लेकिन उस बड़ी व्यवस्था का हिसाब कितने लोग जानते हैं, जिसने आज सुबह हमें सुरक्षित घर से बाहर निकलने और नाश्ते तक पहुंचने में मदद की? शायद अब इसे बदलने का समय है. एक साथ बहुत कुछ जानने की जरूरत नहीं है. बस एक-एक सवाल पूछकर.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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