सिद्धार्थनगर: गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू, 145 गांवों में खरीद-फरोख्त पर लगी रोक

सिद्धार्थनगर : गोरखपुर से शामली तक बनने वाले महत्वाकांक्षी हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद सिद्धार्थनगर जिले के 145 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री (खरीद-फरोख्त) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. इस फैसले से एक्सप्रेस-वे के निर्माण का रास्ता तो साफ हो गया है, लेकिन प्रभावित किसानों के बीच अपने भविष्य और मुआवजे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
तीन तहसीलों के 145 गांव होंगे प्रभावित
लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर के दायरे में सिद्धार्थनगर की तीन तहसीलों के गांव आ रहे हैं. प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार:
डुमरियागंज तहसील: 56 गांव (प्रमुख रूप से बेतनार मुस्तहकम, जहदा, डोमसरा, पलेसर, भीटानानकार आदि).
बांसी तहसील: 51 गांव.
इटवा तहसील: 38 गांव.
इन गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसके चलते प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
क्यों लगाई गई है रोक?
उपनिबंधक तंजीम खान के अनुसार, शासन के निर्देश पर इन गांवों में जमीन के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य मुआवजा वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और बाद में होने वाले किसी भी मालिकाना हक संबंधी विवाद से बचना है. अधिसूचना प्रभावी होने के बाद अब इन जमीनों का न तो बैनामा हो सकेगा और ना ही कोई नया निर्माण.
”अधिसूचना के बाद चिह्नित गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसका उद्देश्य अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया को विवाद-मुक्त रखना है.”
— तंजीम खान, उपनिबंधक
किसानों में असमंजस, विकास की उम्मीद
एक ओर जहां इस एक्सप्रेस-वे से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और औद्योगिक विकास के नए रास्ते खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर किसान परेशान हैं. कई ग्रामीण अपनी पारिवारिक जरूरतों के लिए जमीन बेचने की योजना बना रहे थे, जो अब ठंडे बस्ते में चली गई है. किसानों की मांग है कि उन्हें जमीन का उचित बाजार मूल्य और समय पर मुआवजा दिया जाए ताकि उनकी अनिश्चितता समाप्त हो सके.










