केंद्रीय बजट पर सांसद राजकुमार रोत का तंज: बोले- युवाओं को शिक्षा और रोजगार चाहिए, सरकार सिखा रही रील बनाना

डूंगरपुर: केंद्रीय बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजकुमार रोत ने इसे रील बजट करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट देश के युवाओं, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों की उम्मीदों को दरकिनार कर केवल उद्योगपतियों और आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
युवाओं को शिक्षा की जगह रील बनाने की ट्रेनिंग
सांसद रोत ने बजट के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में युवाओं को रील बनाने और गेमिंग स्टार्टअप की ट्रेनिंग देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान कर रही है. उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, लेकिन सरकार उन्हें रील बनाने की ट्रेनिंग दे रही है. यह युवाओं के भविष्य के साथ मजाक है.
आदिवासी और पिछड़ों की अनदेखी का आरोप
रोत ने बजट भाषण की प्रतियों का हवाला देते हुए कहा कि पूरे बजट में आदिवासियों और हाशिए पर खड़े समाज के लिए कोई ठोस योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि बजट में अनुसूचित जाति और जनजाति के विकास की बात केवल एक पंक्ति तक सीमित है, जबकि उनके लिए किसी विशेष वित्तीय प्रावधान का उल्लेख नहीं है.
चुनावी और उद्योगपति समर्थक बजट
सांसद ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट अर्थव्यवस्था को सुधारने के बजाय पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों को देखते हुए तैयार किया गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खनिज क्षेत्रों में मालवाहक कॉरिडोर बनाना आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को उद्योगपतियों के हवाले करने की एक सोची-समझी रणनीति है.
महंगाई और मंगलसूत्र पर घेरा
प्रधानमंत्री के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए राजकुमार रोत ने कहा कि सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण अब वास्तव में आम गरीब महिला का मंगलसूत्र उससे छीना जा रहा है. उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण गरीब तबके का व्यक्ति अपने परिवार के लिए बुनियादी गहने भी नहीं खरीद पा रहा है.
निजीकरण को बढ़ावा देने वाला बजट
सांसद ने बजट को निजीकरण को बढ़ावा देने वाला और निराशाजनक बताते हुए कहा कि इससे केवल भाजपा से जुड़े लोगों और बड़े उद्योगपतियों का भला होगा, जबकि देश का आम नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है.

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