धान खरीदी शुरू—और खेल भी?—लेकिन अवैध तस्करी पर प्रशासन खामोश! जिले में हजारों क्विंटल धान छिपे होने की आशंका

सूरजपुर : जिले में 15 नवंबर से धान खरीदी प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन खरीदी के पहले ही प्रतापपुर और सीमावर्ती इलाकों में कोचियों और राइस मिलर्स की संदिग्ध गतिविधियाँ तेजी से बढ़ गई हैं.इलाके में अवैध भंडारण का खेल इस हद तक फैल गया है कि सूत्रों के अनुसार कई गोदामों और निजी भवनों में हजारों क्विंटल धान छिपा होने की संभावना है.
बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से धान की बड़े पैमाने पर तस्करी की जा रही है.कोचिए 1500–1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर सस्ते में धान खरीदकर ट्रकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ पहुंचा रहे हैं.यहां पहुंचने के बाद समिति प्रबंधकों और कुछ मिलर्स की मिलीभगत से इस बाहरी धान को किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री डालकर समर्थन मूल्य में बेचने की तैयारी की जा रही है.यह रैकेट हर साल सक्रिय होता है और सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाता है.
स्थानीय लोगों का दावा है कि मंडी विभाग को इस अवैध धंधे की पूरी जानकारी है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.ग्रामीणों ने बताया कि चुनिंदा गोदामों और मिलर्स के परिसर में देर रात वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है, फिर भी विभागीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहे। इससे प्रशासन की सुस्ती और संभावित मिलीभगत पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
चेकपोस्टों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि कुछ कर्मचारी मोटी रकम लेकर तस्करी वाले ट्रकों को बिना जांच-पड़ताल अंदर प्रवेश करा रहे हैं.स्थानीय लोग खुलकर कह रहे हैं कि प्रशासनिक टीमों के निष्क्रिय बने रहने से पूरा अवैध नेटवर्क और मजबूत होता जा रहा है.
किसानों और ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जल्द सख्ती नहीं की गई, तो खरीदी के दौरान फिर वही “वार्षिक घोटाला” दोहराया जाएगा.लोगों का कहना है कि अचानक छापेमारी हो, तो प्रतापपुर क्षेत्र से बड़ी मात्रा में अवैध धान बरामद हो सकता है.
फिलहाल स्थिति यह है कि कोचिए सक्रिय हैं, तस्करी चरम पर है और प्रशासन पूरी तरह खामोश—जिससे आने वाले दिनों में बड़ा घोटाला सामने आने की आशंका बढ़ गई है.











