दुर्ग जिले में धान खरीदी तेज, अब तक 2.68 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपज का उपार्जन

राज्य सरकार की किसान हितैषी और पारदर्शी नीतियों का असर दुर्ग जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर साफ नजर आ रहा है। जिले में धान उपार्जन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है और बड़ी संख्या में किसान सरकारी व्यवस्था से संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। धान विक्रय को सरल और सुगम बनाने के लिए किए गए सुधारों से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
धान बेचने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए लागू किए गए “तुंहर टोकन” मोबाइल एप ने किसानों की परेशानियों को काफी हद तक कम किया है। 24 घंटे टोकन जारी होने की सुविधा के चलते किसानों को अब किसी तय समय का इंतजार नहीं करना पड़ता। किसान मोबाइल एप के जरिए टोकन लेकर निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंच रहे हैं। धान विक्रय के बाद त्वरित और ऑनलाइन भुगतान से किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
जिले में अब तक 2,68,901.52 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिस पर लगभग 63,749.45 लाख रुपये की लागत आई है। इस प्रक्रिया से 50,718 किसान लाभान्वित हुए हैं। किसानों को अब तक 58,163.09 लाख रुपये का भुगतान सीधे उनके खातों में ऑनलाइन माध्यम से किया गया है, जिससे किसानों में संतोष और खुशी का माहौल है।
धान खरीदी के साथ-साथ उपार्जन केंद्रों से धान के उठाव में भी तेजी आई है। अब तक 88,936.60 मीट्रिक टन धान के लिए डीओ और टीओ जारी किए जा चुके हैं, जबकि 65,765.98 मीट्रिक टन धान का वास्तविक उठाव हो चुका है। समय पर उठाव होने से उपार्जन केंद्रों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो रहा है, जिससे अन्य किसानों को भी समय पर धान बेचने का अवसर मिल रहा है।
सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता का सकारात्मक असर यह भी सामने आया है कि किसान स्वयं रकबा समर्पण कर बिचौलियों पर रोक लगाने में सहयोग कर रहे हैं। जिले में 25,932 लघु किसानों ने अब तक 501.86 हेक्टेयर रकबा समर्पित किया है, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि धान की खरीदी वास्तविक किसानों से ही हो।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपार्जन केंद्रों में पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। बारदाने की कोई कमी नहीं है और वर्तमान में केंद्रों में 38,20,547 बारदाने उपलब्ध हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो रही है। कुल मिलाकर दुर्ग जिले में धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है और सरकारी नीतियों पर उनका विश्वास लगातार बढ़ रहा है।









