ओपन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार भुवन सिंह सस्पेंड:विधानसभा में गलत जानकारी देने पर उच्च शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई, भर्ती में गड़बड़ी का है मामला

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. भुवन सिंह राज को उच्च शिक्षा विभाग ने सस्पेंड कर दिया है। यूनिवर्सिटी में 8 पदों पर भर्ती में गड़बड़ी को लेकर विधानसभा में पूछे गए सवाल पर उन्होंने भ्रामक जानकारी दी, जिसके चलते ये कार्रवाई की गई है।
सस्पेंशन ऑर्डर जारी होने के साथ ही कुलपति प्रो. वीके सारस्वत ने रजिस्ट्रार को कार्यमुक्त कर दिया है। उनकी जगह परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनीष साव को प्रभारी रजिस्ट्रार बनाया गया है।
दरअसल, ओपन यूनिवर्सिटी में तत्कालीन कुलपति डॉ. वंशगोपाल ने उच्च शिक्षा विभाग से 8 पदों स्वीकृत कराया था। जिसमें सहायक क्षेत्रीय निदेशक के 3 पद, सिस्टम एनालिस्ट के 1, प्रोग्रामर के 1, छात्र कल्याण अधिकारी के 1, सहायक छात्र कल्याण अधिकारी के 1 और जनसंपर्क अधिकारी के 1 पद शामिल हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू हुई, तब अनियमितता के आरोप लगे।
इसके बाद भी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सभी उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी है। लोगों से मिली शिकायत के आधार पर अकलतरा विधायक डॉ. राघवेंद्र कुमार सिंह ने मार्च 2025 के विधानसभा सत्र में यूनिवर्सिटी में भर्ती की गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाया था। इसमें उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और अपात्र को नौकरी देने को लेकर जानकारी मांगी थी।
रजिस्ट्रार ने विधानसभा को दी भ्रामक जानकारी
इस मामले में उच्च शिक्षा विभाग ने ओपन यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा था। इसका जवाब कुलसचिव डॉ. भुवन सिंह राज ने दिया। उस जानकारी को गलत और भ्रामक माना गया। इस मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। डॉ. राज ने जो जवाब दिया, उसे भी उच्च शिक्षा विभाग ने अमान्य कर दिया।
विधानसभा में गलत जानकारी देने पर 10 नवंबर को उच्च शिक्षा विभाग ने डॉ. राज को निलंबित कर दिया है। जिस पर मंगलवार को कुलपति प्रो. सारस्वत ने डॉ. राज को कार्यमुक्त कर कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार परीक्षा नियंत्रक डॉ. साव को दे दिया है।
बिना जांच के खोल दिया नियुक्ति का लिफाफा
यूनिवर्सिटी में स्व वित्तीय योजना के तहत की जा रही भर्ती के लिए विश्वविद्यालय ने पहले जनवरी 2023 में विज्ञापन जारी किया था। लेकिन, एक अभ्यर्थी किरण दुबे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। जिसके कारण उसे निरस्त कर फरवरी 2023 में फिर से विज्ञापन जारी किया गया। इन पदों की लिखित परीक्षा और साक्षात्कार भी यूनिवर्सिटी ने लिया।
इस बीच इन पदों के विज्ञापन, उम्र सीमा, लिखित परीक्षा, आरक्षण, साक्षात्कार की लिस्ट को लेकर लगातार शिकायतें हुई। जिसमें पीएमओ, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री तक शिकायत की गई। शिकायत के आधार पर राजभवन और राज्य शासन, उच्च शिक्षा विभाग ने जांच पूरी होने तक लिफाफा खोलने से रोक लगा दिया। अनियमितता की शिकायत 8 पदों पर हुई थी।
जांच के लिए कमेटी भी बनी। कमेटी जांच कर रही थी कि तत्कालीन राज्यपाल ने लीगल एडवाइज लेकर लिफाफा खोलने की अनुमति दे दी। जिस दिन आचार संहिता लगा, उसी दिन सुबह तत्कालीन कुलपति प्रो. बंशगोपाल सिंह ने लिफाफा खोलकर सभी पदों पर ज्वाइनिंग दे दी। हालांकि, अभी भी उच्च शिक्षा विभाग की जांच इस मामले में जारी है।
कुलपति बोले- शासन ने जारी किया है निलंबन आदेश
ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. वीके सारस्वत ने बताया कि, विधानसभा में गलत जानकारी देने के कारण रजिस्ट्रार भुवन सिंह राज को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश जारी होने के बाद उन्हें कार्यमुक्त करते हुए परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनीष साव को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।











