औरंगाबाद: मुखिया की गिरफ्तारी पर संघ ने जताया आक्रोश, दी आंदोलन की चेतावनी

औरंगाबाद: देव प्रखंड क्षेत्र के दुलारे पंचायत के मुखिया सह पैक्स अध्यक्ष बिजेंद्र कुमार यादव की गिरफ्तारी पर जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज है. औरंगाबाद शहर के एक निजी होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान मुखिया संघ के जिलाध्यक्ष सुजीत सिंह ने मुखिया की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की है.
उन्होंने कहा कि पंचायत में विकास कार्यों की निरीक्षण करना या गुणवत्ता पर आधारित निर्माण कार्यों पर जोर देना पंचायत प्रतिनिधियों का संवैधानिक अधिकार है. लेकिन जिस तरह से भवन निर्माण विभाग के जेई के द्वारा मुखिया पर झूठा मुकदमा किया, वह गलत है. उन्होंने कहा कि दुलारे पंचायत के पथरा में बन रहे डॉ भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय के गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए. जेई ने मुखिया पर साज़िश के तहत रंगदारी का आरोप लगाया है. क्या जेई साहब बताएंगे, उनसे कितने पैसों की मांग की जा रही थी.
उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुखिया पर थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद 24 घंटे में गिरफ्तारी हो गई। सरकार और जिला प्रशासन से मांग करता हूं. ठीक उसी तरह आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्य के गुणवत्ता की जांच कर प्रशासन को सार्वजनिक करना चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है कि मुखिया संघ निर्माणधीन आवासीय विद्यालय का निरीक्षण करेगा और परत दर परत धांधली और भ्रष्टाचार का उजागर करेगा. हमारी मांग है कि जब तक निर्माणधीन आवासीय विद्यालय की जांच न हो जाएं तब तक निर्माण कार्य बंद किया जाएं.
उन्होंने कहा कि बिहार में सुशासन की सरकार है, लेकिन अधिकारी सरकार को बदनाम कर रहे है. कमीशन खोरी चरम पर है. अधिकारियों की मनमानी से पंचायत प्रतिनिधियों को क्षेत्र में काम करना अब मुश्किल हो गया है. जनता की मांग पर गुणवत्ता की बात करना यदि रंगदारी और धमकाना है तो पदाधिकारी तय करें, आखिर पंचायत प्रतिनिधियों के निरीक्षण का मानदंड क्या होगा. यदि हमारे अधिकारों का हनन होगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे. जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन धरना के साथ-साथ आंदोलन करेंगे. सूही पंचायत के मुखिया मंजीत यादव ने कहा कि पंचायत में हो रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करना मुखिया का संवैधानिक अधिकार है.
बिहार में अफसरशाही और नौकरशाही के हावी हैं. जनप्रतिनिधियों के बजाय अफसर फैसले ले रहे हैं और सरकारी कामों में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी चरम पर है. उन्होंने थानाध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए है. कहा कि थानेदार कानून की बात करते है। लेकिन बिना जांच पड़ताल के मुखिया को जेल भेज देना किस कानून में वर्णित है.
इस अवसर पर ओबरा प्रखंड अध्यक्ष उदय नारायण सिंह, बेढ़ना पंचायत के मुखिया निशा सिंह, डुमरी पंचायत के मुखिया रविंद्र यादव, विशाल कुमार, रिसियप मुखिया पुटू यादव, डुमरा से गुलाम सरवर, पड़रावा से अनिल पासवान, संडा से गुलाम सरवर, खिरियावा से धनंजय यादव, भवानीपुर से अदपा कुमारी सहित अन्य पंचायतों के मुखिया मौजूद रहे.










