उत्तर प्रदेश: टीईटी की अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, सिद्धार्थनगर में हुंकार; जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी

सिद्धार्थनगर: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के नए नियमों ने शिक्षकों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है. गुरुवार को जिले के 400 से अधिक शिक्षकों ने जिला मुख्यालय स्थित बीएसए (BSA) ग्राउंड पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. संयुक्त शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित इस धरने में शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाएगा.
शिक्षकों के विरोध का मुख्य कारण 1 सितंबर 2025 को आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला है. इस आदेश के बाद अब 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है.
पुरानी व्यवस्था: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था. इसके तहत केवल इस तिथि के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य थी.
नया संकट: पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को मिली छूट खत्म होने से अब हजारों शिक्षकों की सेवा और भविष्य पर तलवार लटक गई है.
गैर-शैक्षणिक कार्यों पर भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक नेता राधे रमण त्रिपाठी और पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र मिश्र ने शिक्षकों की अन्य समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया:
अत्यधिक बोझ: शिक्षकों से आधार कार्ड फीडिंग, विभिन्न सर्वेक्षण और अन्य गैर-जरूरी डेटा एंट्री के काम कराए जा रहे हैं.
गुणवत्ता पर असर: नेताओं का तर्क है कि इन बाहरी कार्यों के कारण शिक्षक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के अपने मूल कर्तव्य से भटक रहे हैं.
शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्यों तक सीमित रखा जाए और टीईटी की अनिवार्यता के फैसले को वापस लिया जाए.
”हम शिक्षा व्यवस्था को सुधारना चाहते हैं, लेकिन नियमों के नाम पर अनुभवी शिक्षकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेश भर के शिक्षक दिल्ली में डेरा डालेंगे.”
– राधे रमण त्रिपाठी, शिक्षक नेता











