सुशासन सरकार में छत्तीसगढ़ के घरों में हो रहा बिजली उत्पादन, आर्थिक बचत के साथ रोजगार के खुल रहे नए द्वार

रायपुर: आज पूरा देश स्वदेशी और स्थानीय संसाधनों को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे समय में सौर ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनकर उभर रही है. सौर ऊर्जा एक स्वच्छ, नवीकरणीय और असीमित ऊर्जा स्रोत है, जिससे परंपरागत बिजली की बचत होने के साथ–साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है. आज सौर पैनल के माध्यम से आम नागरिक अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर बिजली बिल में बड़ी राहत पा रहा है. इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है. सरकार भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी और प्रोत्साहन के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग सौर ऊर्जा अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें.
छत्तीसगढ़ प्रदेश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने वाला अग्रणी राज्य बन रहा है. छत्तीसगढ़ के नागरिक अब बिजली खरीदने वाला नहीं, बिजली बेचने वाला बन रहा है. सुशासन सरकार में सौर ऊर्जा क्रांति की झलक देखने को निरंतर मिल रही है. आज हर गांव और सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है. जिससे नागरिकों को पैसे की बचत के साथ–साथ आर्थिक लाभ भी मिल रहे है. सौर ऊर्जा अपनाना आर्थिक लाभ बस नहीं है यह स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में एक जिम्मेदार कदम भी है.
क्या है पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जिससे हो रही पैसों की बचत?
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसकी शुरुआत 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई. प्रधानमंत्री के आह्वान “हर घर सोलर, हर घर उजाला” को आत्मसात कर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इसे छत्तीसगढ़ के घर–घर तक पहुंचा रहे हैं. इस योजना का उद्देश्य देश के 1 करोड़ घरेलू परिवारों को अपने घरों की छत पर सोलर पैनल स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करना है, जिससे वे प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्राप्त कर सकें. इस योजना के माध्यम से नागरिक बिजली खरीदने वाले नहीं, बिजली बनाने और बेचने वाले बन रहे हैं.
डबल सब्सिडी से हो रहा दुगुना लाभ
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये तक और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने से अब घरों में सोलर प्लांट लगाना आसान और किफायती हो गया है. यह योजना बिजली बिल कम करने के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. 1kw – 45000, 2kw – 90000, 3kw – 108000 रुपए की सब्सिडी सरकार द्वारा दी जा रही है.

सुशासन सरकार में रोजगार का साधन बन रहा सौर ऊर्जा
सौर ऊर्जा आज केवल स्वच्छ और सस्ती बिजली का माध्यम नहीं बस नहीं है, यह बड़े पैमाने पर रोजगार का सशक्त साधन भी बन रहा है. सोलर पैनल निर्माण, स्थापना, मेंटेनेंस, बैटरी स्टोरेज, तकनीकी सेवाओं और वितरण जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं. गांवों और शहरों में सोलर प्लांट, रूफटॉप सोलर और ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर तकनीशियन, इंजीनियर, सुपरवाइजर और श्रमिकों की मांग बढ़ी है. सरकार की विभिन्न सौर ऊर्जा योजनाएं और सब्सिडी कार्यक्रम इस क्षेत्र को और गति दे रहे हैं, जिससे स्वरोजगार और स्टार्टअप के अवसर भी बढ़ रहे हैं. यह योजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रोजगार सृजन का मजबूत आधार बन रही हैं.
सौर ऊर्जा क्रांति को लेकर राज्य सरकार की व्यापक पहल
राज्य सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. अब तक 55 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 5 हजार से अधिक घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं और लगभग 16 हजार घरों में कार्य प्रगति पर है. मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसके साथ ही 2,600 से अधिक सरकारी इमारतों में सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं. आगामी दो वर्षों में 2000 मेगावॉट क्षमता के सोलर पार्क विकसित किए जाएंगे. 53 गांवों को सोलर विलेज के रूप में चयनित किया गया है, जबकि दुर्गम क्षेत्रों में 330 मेगावॉट के मिनी ग्रिड प्लांट और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम जारी है. ये सभी प्रयास राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक सस्ती व स्वच्छ बिजली पहुंचाने की सरकार की दृढ़ संकल्प को दर्शाता हैं.
छत्तीसगढ़ में स्थापित हुआ भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बैटरी संचयन संयंत्र
छत्तीसगढ़ ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. प्रदेश के राजनांदगांव में भारत का सबसे बड़ा 100 मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा बैटरी संचयन संयंत्र स्थापित किया गया है। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है. इस संयंत्र में 3 घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता (लगभग 40 मेगावाट प्रति घंटा) उपलब्ध है. दिन में उत्पन्न सौर ऊर्जा को अत्याधुनिक बैटरियों में संग्रहित किया जाता है और शाम के समय, जब बिजली की मांग अधिक होती है, तब इस ऊर्जा का उपयोग किया जाता है. इतने बड़े पैमाने पर इस प्रकार की तकनीक का प्रयोग भारत में पहली बार किया गया है. यह परियोजना 450 एकड़ बंजर भूमि पर स्थापित की गई है. यह पहल वर्ष 2030 तक देश के ग्रिड में 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा को एकीकृत करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
वर्चुअल नेट मीटरिंग सिस्टम स्थापित करने वाला देश का पहला शहर बना रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में रायपुर ने ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वर्चुअल नेट मीटरिंग (VNM) सिस्टम स्थापित करने वाला देश का पहला शहर बनने का गौरव प्राप्त किया है. यह प्रणाली उन परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके पास अपनी छत पर सोलर पैनल लगाने की पर्याप्त जगह नहीं है. इसके तहत एक केंद्रीय स्थान पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाता है, जिसकी उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जाती है और कुल उत्पादन को उपभोक्ताओं के निवेश या हिस्सेदारी के अनुसार विभाजित किया जाता है. रायपुर की पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में इस प्रणाली के सफल संचालन से 20 परिवारों को बिजली बिल में उल्लेखनीय राहत मिल रही है. यह सामूहिक सहभागिता के माध्यम से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है. रायपुर की यह उपलब्धि अन्य शहरों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी.

सौर ऊर्जा प्रोत्साहन नीति से प्रेरित होकर फ्लैट में रहने वालो ने मिलकर लगवाया सौर पैनल
रायपुर की पार्थिवी पैसिफिक रिहायशी सोसायटी के 20 परिवारों ने मिलकर एक सामूहिक सोलर प्लांट स्थापित किया है. कैपेक्स मॉडल पर लगाए गए इस प्रोजेक्ट में सभी परिवारों ने लगभग 1.20 लाख रुपये का निवेश किया, जबकि केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और छत्तीसगढ़ सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने से आर्थिक भार काफी कम हो गया. लगभग 24 लाख रुपये की लागत से स्थापित यह सोलर प्लांट पूरी तरह सोसायटी की संपत्ति है. सोलर सिस्टम लगने के बाद इसका सीधा लाभ बिजली बिल में दिखाई देने लगा है. अनुमान है कि इससे सालाना करीब 6 लाख 30 हजार रुपये की बचत होगी, यानी प्रत्येक परिवार को लगभग 31,500 रुपये की राहत मिलेगी. हर परिवार को लगभग 300 यूनिट तक बिजली क्रेडिट मिल रहा है, जिससे मासिक खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है.










