दर्द होने पर हर 2 में से एक भारतीय खुद से खा लेता है पेनकिलर, यह कितना खतरनाक है?

हम सभी ने अपने घरों में ही ये देखा है कि जब भी कोई व्यक्ति शरीर के किसी दर्द से परेशान होता है, तो वो डॉक्टर की सलाह लेने के बजाय खुद ही किसी मेडिकल शॉप से दवा खरीद लेता है. या फिर घर में ही पड़ी कोई भी पेनकिलर खा लेता है. हालांकि, उस वक्त के लिए तो उसे दर्द से आराम मिल जाता है, लेकिन बाद में ये लापरवाही उनकी हेल्थ के लिए सबक बनकर आती है. एक स्टडी ने भारतीयों की इसी आदत पर बड़े सवाल खड़े किए हैं.

लोग सलाह लेने की जगह घर में पहले से रखी कोई पेनकिलर गोली याद आती है और दर्द कम करने के लिए उसे खा लिया जाता है. लेकिन, समस्या तब शुरू होती है, जब यह आदत बार-बार होने लगे. भारत में दर्द की दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सामने आई एक स्टडी और अब दवा रेगुलेटर की चेतावनी ने इसी आदत पर सवाल खड़े किए हैं.

रोज के काम पर पड़ रहा इफेक्ट

स्टडी के हवाले से बात करें, तो इसमें 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के उन लोगों को शामिल किया गया, जिनका दर्द उनकी रोज के काम को प्रभावित कर रहा था. इस खास समूह में करीब हर दो में से एक व्यक्ति पेनकिलर का इस्तेमाल कर रहा था. अब सवाल यह है कि दर्द की दवा आखिर कितनी सुरक्षित है?

दवाओं के इस्तेमाल को लेकर वॉर्निंग

आम तौर पर दर्द कम करने के लिए ली जाने वाली कई दवाएं, खासकर NSAIDs, अगर बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार या लंबे समय तक ली जाएं तो नुकसान कर सकती हैं. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने हाल ही में NSAIDs और एंटीबायोटिक के गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर वॉर्निंग दी है.

कौन सी परेशानी है ज्यादा?

खासकर जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है या किडनी कमजोर होने का खतरा है, उन्हें ऐसी दवाएं लेने से पहले डॉक्टर को अपनी स्थिति बताने की सलाह दी गई है. इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोगों में कम समय के लिए इस्तेमाल भी जोखिम पैदा कर सकता है.

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इसलिए दर्द दबाने के लिए बार-बार गोली लेना आसान रास्ता जरूर लग सकता है, लेकिन हर दर्द का कारण सिर्फ एक गोली से खत्म नहीं होता. कई बार यह असली बीमारी की पहचान में देरी भी कर सकता है.

स्टडी में क्या सामने आया?

  • BMJ की स्टडी में 45 साल से ज्यादा उम्र के 15,587 लोगों के आंकड़ों का एनालिसिस किया गया.
  • ये सभी ऐसे लोग थे जिनका दर्द उनकी सामान्य रोजमर्रा की गतिविधियों में रुकावट डाल रहा था.
  • इनमें 76.6% लोगों ने दर्द के लिए किसी न किसी तरह की दवा का इस्तेमाल किया.
  • 46.02% लोगों ने दर्द कम करने वाली पेनकिलर का इस्तेमाल किया.
  • दर्द की दवाओं के इस्तेमाल में राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर देखा गया.

किडनी के लिए क्यों बन सकती है खतरा?

हर पेनकिलर एक जैसी नहीं होती. CDSCO की ताजा चेतावनी खास तौर पर NSAIDs यानी Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs के बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर है. इन दवाओं का इस्तेमाल दर्द और सूजन कम करने के लिए किया जाता है. लेकिन गलत मात्रा, लंबे समय तक इस्तेमाल या पहले से मौजूद किडनी की समस्या की स्थिति में इनसे किडनी को नुकसान पहुंच सकता है. कुछ पेनकिलर का गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी असर डाल सकता है.

डॉक्टरों ने भी दी चेतावनी

  • AIIMS के नेफ्रोलॉजिस्ट प्रोफेसर संदीप महाजन ने इस पर बात करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि पेनकिलर का ज्यादा लेना और लंबे समय तक इस्तेमाल खासकर पहले से किडनी की बीमारी वाले लोगों में किडनी की काम करने की क्षमता कम होने की रफ्तार बढ़ा सकता है. उनका कहना है कि प्रिस्क्रिप्शन दवाएं डॉक्टर की निगरानी में और बताई गई खुराक और एक तय समय के अनुसार ही लेनी चाहिए.
  • मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के डॉ दिनेश खुल्लर ने भी चेताया कि NSAIDs का गलत इस्तेमाल गंभीर किडनी इंजरी का कारण बन सकता है. उन्होंने कहा कि पहले से किडनी की समस्या वाले लोगों में थोड़े समय का इस्तेमाल भी जोखिम भरा हो सकता है.

राज्यों के आधार पर कौन आगे?

हालांकि, अलग-अलग राज्यों में इसका आंकड़ा काफी अलग रहा. मिजोरम में दर्द के इलाज का इस्तेमाल सबसे कम 20% था, जबकि पुडुचेरी में यह 92.17% तक पहुंच गया. खास तौर पर दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल 46.02% लोगों ने किया, जबकि 45.21% लोगों ने बाहरी तौर पर लगाने वाली दवाओं या इलाज का सहारा लिया. वहीं डॉक्टर की सलाह लेकर दवा का इस्तेमाल केवल 8.06% लोगों ने किया. सिर्फ पेनकिलर की बात करें, तो इनका इस्तेमाल सिक्किम में सबसे कम 3.33% और तेलंगाना में सबसे ज्यादा 68.33% पाया गया.

राज्य का क्या है आंकड़ा?

किन समस्याओं से ज्यादा है परेशान?

स्टडी में 45 साल और उससे ज्यादा उम्र के 15,587 लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें दर्द के कारण रोज के काम करने में परेशानी होती थी. इनमें करीब 64% महिलाएं थीं और लगभग 74% लोग ग्रामीण इलाकों में रहते थे. सबसे आम समस्याओं में दांतों का दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, हड्डी-जोड़ों की बीमारी और पाचन से जुड़ी दिक्कतें शामिल थीं. दर्द की दवा का इस्तेमाल कुछ खास स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में ज्यादा देखा गया.

स्टडी के मुताबिक, 45-74 साल के लोगों में 75 साल से ज्यादा उम्र वालों की तुलना में पेनकिलर का इस्तेमाल ज्यादा था. ग्रामीण इलाकों में रहने वाले और ज्यादा संपन्न लोगों में भी इसका इस्तेमाल ज्यादा पाया गया. कैंसर, हड्डी-जोड़ों की बीमारी, दांतों के दर्द और पेट से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों में दर्द की दवा लेने की संभावना ज्यादा थी. डॉक्टर से सलाह लेने वाले लोगों में भी इसका इस्तेमाल अधिक देखा गया.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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