भगवान जगन्नाथ को कौन से फूल हैं प्रिय, जिनको चढ़ाने से तुरंत हो जाते हैं खुश?

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का भव्य उत्सव 16 जुलाई से शुरू होगा और 24 जुलाई तक चलने वाला है. इस शुभ अवसर पर पुरी धाम से लेकर देशभर में भक्त भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा देवी की पूजा करेंगे. सनातन धर्म में यह माना जाता है कि भक्ति के अनुष्ठानों से भगवान खुश होते हैं. हालांकि, हर देवी-देवता के अपने प्रिय फूल और वस्तुएं होती हैं. शास्त्रों और पुरी मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ देव के कुछ विशेष प्रिय फूल हैं, जिनकी पूजा करने पर वे तुरंत खुश हो जाते हैं
यदि आप भी घर या मंदिर में भगवान जगन्नाथ की पूजा करना चाहते हैं, तो भगवान जगन्नाथ के प्रिय फूलों की लिस्ट और उनकी पूजा में वर्जित फूलों के बारे में जान लीजिए. भगवान जगन्नाथ वास्तव में भगवान विष्णु या कृष्ण का अवतार हैं इसलिए भगवान विष्णु की तरह तुलसी के पत्ते भगवान जगन्नाथ के चरणों को अत्यंत प्रिय हैं. तुलसी के बिना भगवान महाप्रभु की पूजा या 56 भोग अपूर्ण रहते हैं.
इसके अलावा, उनकी पूजा में कमल का फूल सर्वोपरि है. कमल का फूल पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है, जिसे भगवान महाप्रभु को अर्पित करने से भक्त के हृदय की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भगवान महाप्रभु को सुगंधित फूल बहुत पसंद हैं. इन फूलों का उपयोग पुरी मंदिर में दैनिक सजावट और पूजा अनुष्ठानों में किया जाता है.
भगवान जगन्नाथ को ये फूल हैं प्रिय
चमेली और मालती: इन सफेद सुगंधित फूलों का उपयोग प्रतिदिन भगवान महाप्रभु के लिए माला बनाने में किया जाता है.
चंपा: चंपा के फूलों की सुगंध भगवान जगन्नाथ को बहुत पसंद आती है.
पारिजात: इन फूलों का व्यापक रूप से पूजा-अर्चना और सजावट में उपयोग किया जाता है.
कदंब और रजनीगंधा: कदंब का फूल भगवान कृष्ण का पसंदीदा है और इसका जगन्नाथ पूजा में विशेष महत्व है.
पुरी के जगन्नाथ संप्रदाय से जुड़े लोगों के अनुसार, तुलसी के अलावा भगवान महाप्रभु की पूजा में विशेष रूप से ‘दयाना’ नामक सुगंधित पत्ते का उपयोग किया जाता है. इसके अतिरिक्त हर रात्रि को सोने से पहले भगवान महाप्रभु को सुगंधित फूलों और तुलसी से बनी एक विशेष ‘बनमाला’ पहनाई जाती है, जिसे ‘बनमाला बेश’ कहा जाता है.
जगन्नाथ पूजा के दौरान कौन से फूल वर्जित हैं?
धतूरा और आक: हालांकि इन फूलों का उपयोग शिव पूजा में किया जाता है, लेकिन जगन्नाथ पूजा में इनका उपयोग वर्जित है.
जावा फूल: देवी काली को प्रिय लाल जावा फूल का उपयोग आमतौर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा में नहीं किया जाता है.
केतकी या कीया: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विष्णु या कृष्ण की पूजा में केतकी के फूलों का उपयोग वर्जित है.
शास्त्रों के अनुसार, यदि आप भगवान महाप्रभु के चरणों में श्रद्धापूर्वक एक तुलसी का पत्ता और एक ताजा कमल का फूल भी अर्पित करते हैं, तो भगवान जगन्नाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त को सुख, समृद्धि और मन की शांति प्रदान करते हैं.











