माओवाद प्रभावित इलाके के युवा बनेंगे पुलिस, ‘मावा मोदोल’ से सपनों को मिली उड़ान

कांकेर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले की वर्तिका काडियाम उन 43 लोगों में शामिल हैं, जिनका पुलिस आरक्षक भर्ती में चयन हुआ है. बरसों तक नक्सल दहशत का दंश झेलने वाले गांवों के युवा अब सरकारी नौकरी करने का सपना साकार कर रहे हैं. वर्तिका अपनी खुशी का इजहार करते हुए सफलता का श्रेय मावा मोदोल कोचिंग को देती हैं. वह कहती हैं कि मावा मोदोल कोचिंग संस्थान के मार्गदर्शन के बिना यह सब कुछ संभव नहीं था. वर्तिका की तरह ही 43 अभ्यर्थी का चयन, पुलिस आरक्षक के लिए हुआ है.
मावा मोदोल क्या है
मावा मोदोल एक कोचिंग संस्थान है, जिसमें नि:शुल्क कोचिंग की सुविधा है. यह कांकेर जिला प्रशासन की एक अभिनव पहल है. यहां विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है. युवक-युवतियों को उत्कृष्ट शिक्षा के साथ ही एक्सपर्ट के जरिए कैरियर गाइडेंस भी दिया जा रहा है.
गोंडी भाषा से लिया गया शब्द
मावा मोदोल शब्द गोंडी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ “मेरी जड़, मेरा भविष्य” है. कांकेर जिला प्रशासन की इस कोचिंग में नक्सल प्रभावित और कांकेर जिला मुख्यालय के वनांचल में रहने वाले स्टूडेंट्स को फ्री कोचिंग के साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी, एक्सपर्ट टीचर, मॉक टेस्ट, कैरियर काउंसलिंग की सुविधा मिलती है.
कांकेर कलेक्टर ने दी बधाई
कांकेर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने सभी चयनित अभ्यर्थियों, उनके पालकों और मावा मोदोल की टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि मावा मोदोल जिला प्रशासन की एक महत्वपूर्ण पहल है. कलेक्टर ने मावा मोदोल की पूरी टीम को बधाई देते हुए अपनी शुभकामनाएं दी हैं.
माव मोदल का उद्देश्य
माओवाद-प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग और एक ऐसा मंच प्रदान करना जहां वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें.









