कैंची धाम में बन रहे ॐ आकार के पुल पर विवाद, जानिए क्यों हो रहा विरोध

कैंची धाम में निर्माणाधीन ॐ आकार के पुल को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पुल के डिजाइन, ऊंचाई और धार्मिक प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से आपत्ति जताई जा रही है। भीमताल के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को शिकायत भेजकर समाधान की मांग की है।
पुल के डिजाइन पर सबसे ज्यादा सवाल
विरोध करने वालों का कहना है कि पुल का भारी-भरकम कंक्रीट ढांचा कैंची धाम के शांत, प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण से मेल नहीं खाता। उनका दावा है कि इस निर्माण से धाम के मूल स्वरूप और आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य पर असर पड़ सकता है।
मंदिर से अधिक ऊंचाई होने का दावा
पुल की ऊंचाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माणाधीन पुल की ऊंचाई कैंची धाम मंदिर से अधिक हो रही है। उनका तर्क है कि इससे मंदिर की दृश्यता और उसकी प्रमुखता प्रभावित हो सकती है।
ॐ का डिजाइन भी बना विवाद की वजह
पुल पर बनाए गए ॐ के डिजाइन को लेकर भी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी की बात सामने आई है। विरोध करने वालों का कहना है कि कुछ कोणों से देखने पर ॐ का स्वरूप उल्टा दिखाई देता है। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतीक का डिजाइन ऐसा होना चाहिए, जो हर दिशा से सही दिखाई दे।
धार्मिक प्रतीक के इस्तेमाल पर आपत्ति
पुल की संरचना में ॐ जैसे धार्मिक प्रतीक को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि धार्मिक प्रतीक का स्वरूप स्पष्ट और सम्मानजनक होना चाहिए, ताकि किसी भी कोण से उसका गलत अर्थ न निकले।
प्राकृतिक सुंदरता बचाने की मांग
कैंची धाम की पहचान उसके प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां होने वाले आधुनिक निर्माण पर्यावरण और धाम की मौजूदा पहचान के अनुरूप होने चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि विकास कार्यों के साथ कैंची धाम की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक माहौल को भी सुरक्षित रखा जाए।
फिलहाल पुल के निर्माण को अवैध घोषित नहीं किया गया है और किसी अदालत की ओर से इसके निर्माण पर रोक का आदेश भी सामने नहीं आया है। विवाद मुख्य रूप से पुल के डिजाइन, ऊंचाई, धार्मिक प्रतीक और धाम के प्राकृतिक स्वरूप पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है।











