नीलगिरि लकड़ी के नाम पर अवैध वसूली, कारोबारियों से गालिगलौज औऱ उगाही की शिकायत – Vayam Bharat


बलरामपुर: वाड्रफनगर क्षेत्र के धनवार वनोपज जांच नाके से नीलगिरी की लकड़ी के अवैध परिवहन का बड़ा मामला सामने आया है. आरोप है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी व सूत्रधारों की मिलीभगत से लंबे समय से ट्रकों के माध्यम से नीलगिरी की लकड़ी की तस्करी की जा रही है.

इस पूरे प्रकरण में वनपाल मथुरा दुबे पर फर्जी परिवहन अनुज्ञा बनवाने के बदले मोटी रकम वसूलने के आरोप गंभीर रूप से लगे हैं. सूत्रों के अनुसार ट्रक ड्राइवरों से नाका पार कराने के लिए प्रति वाहन लगभग पाँच हजार औऱ दस हजार रुपए की वसूली की जाती है. बताया गया कि जशपुर क्षेत्र से ड्राइवरों को फर्जी परिवहन अनुज्ञा बनाकर दी जाती है और इसी के आधार पर वाहन धनवार नाके से बिना रोक-टोक गुजरते हैं. जबकि लकड़ी की कटाई औऱ लोडिंग किसी अन्य जिलों से होती हैं. रकम भुगतान नहीं करने पर संबंधित वाहन को राजसात करने की धमकी भी दी जाती है.

जानकारी में यह भी सामने आया है कि पूरी डील व्हाट्सएप कॉल पर तय होती है और रकम फोनपे के माध्यम से ली जाती है। वसूली गई राशि सफाई कर्मचारी सुरेश यादव के माध्यम से उसकी पत्नी के खाते में जमा कराई जाती है. लगातार हो रही इस अवैध वसूली और लकड़ी परिवहन तंत्र के खुलासे के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है.

कारोबारियों ने जिले के पुलिस अधीक्षक वह कौन मंडल अधिकारी को शिकायत देते हुए मांग किया है कि ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि अवैध कारोबार में संलिप्त दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके. वहीं मामले में वन विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.




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jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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