चमत्कारों की धरती धमतरी: कल खुलेंगे निरई माता के कपाट, ‘अक्षय जल’ का रहस्य भी बना आस्था का केंद्र

धमतरी: छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला इन दिनों आस्था, रहस्य और परंपरा के विराट संगम का साक्षी बनने जा रहा है. के उद्गम स्थल और की तपोभूमि में माँ निरई माता का दिव्य दरबार कल भोर में खुलने जा रहा है. कल भोर में माँ निरई माता के कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालु दिव्य ज्योति के साक्षात्कार करेंगे. इसके साथ ही मुकुंदपुर की पहाड़ी पर ‘अक्षय जल’ का रहस्यमयी कुंड भी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
निरई माता का दिव्य दरबार, साल में सिर्फ 5 घंटे
की दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित माँ निरई माता का सिद्धपीठ वर्ष में केवल एक बार खुलता है. चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को प्रातः 4 से 9 बजे तक मात्र 5 घंटों के लिए कपाट खोले जाएंगे.

भोर की पहली किरण के साथ “जय माता दी” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठेगा. उसी क्षण प्रज्वलित होगी वह अद्भुत दिव्य ज्योति, जो बिना तेल-घी के स्वतः जलती है और नौ दिनों तक अखंड बनी रहती है. इसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचते हैं. यह अलौकिक दृश्य उनके लिए आस्था का गहरा और अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है.
निरई माता का दरबार अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. यहाँ श्रृंगार सामग्री अर्पित नहीं की जाती. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गर्भगृह में केवल पुरुषों को ही प्रवेश की अनुमति है, जिसे भक्त माता की मर्यादा मानकर श्रद्धापूर्वक स्वीकार करते हैं.

मन्नत पूरी होने पर भेंट अर्पित करने और पारंपरिक बलि की प्रथा भी यहां की लोक आस्था का अभिन्न हिस्सा है. इस अवसर पर दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. बताया जाता है कि नवरात्र में यहां हजारो बकरों की बलि दी जाती है.
मुकुंदपुर की पहाड़ी पर ‘पाताल गंगा’ का रहस्य
मुकुंदपुर की पहाड़ी पर स्थित अगस्त ऋषि के आश्रम और सुतीक्षण मुनि की गुफा के समीप मिला रहस्यमयी कुंड इन दिनों श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है. वर्ष 2008 में आध्यात्मिक संकेत के बाद खोजबीन के दौरान यह कुंड मिला था, जिसका जल आज तक कभी नहीं सूखा.

भीषण गर्मी में भी लबालब भरा रहने वाला यह कुंड स्थानीय लोगों के लिए ‘गंगा मैया’ का साक्षात स्वरूप माना जाता है. नवरात्रि के दौरान भंडारे और पूजा-अर्चना में इसी जल का उपयोग किया जाता है, फिर भी जल स्तर में कोई कमी नहीं आती.
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पवित्र जल के आचमन और छिड़काव से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कई रोगों से राहत मिलती है. यही कारण है कि यह स्थल आस्था और रहस्य का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है.
प्रशासन अलर्ट, व्यवस्थाएं चाक-चौबंद
कल होने वाले इस बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. दुर्गम मार्गों का सुधार, पेयजल, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. साथ ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

आस्था और रहस्य का जीवंत अध्याय
एक ओर बिना तेल-घी के जलती निरई माता की अखंड ज्योति, तो दूसरी ओर कभी न सूखने वाला ‘अक्षय कुंड’. की यह पावन धरती आज भी अपने भीतर चमत्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा को संजोए हुए है.
कल सुबह जब पहली किरण इन पहाड़ियों को स्पर्श करेगी, तब ‘जय माता दी’ के जयघोष के साथ धमतरी एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सशक्त रूप में प्रस्तुत करेगा.









