मां कालरात्रि को आज चढ़ाएं ये खास भोग, हर संकट से मिलेगी मुक्ति

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन देवी दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है. मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों के सभी भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं. उनका रूप भले ही भयंकर हो, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और सही भोग अर्पित करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं. आइए जानते हैं मां कालरात्रि को कौन सा भोग सबसे प्रिय है और कैसे करें उनकी पूजा.

कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप?

मां कालरात्रि का वर्ण श्याम (काला) होता है, उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में बिजली की माला सुशोभित रहती है. वे गधे पर सवार होती हैं. उनके चार हाथ होते हैं, एक में खड्ग, दूसरे में लोहे का कांटा और बाकी दो हाथ अभय व वर मुद्रा में होते हैं.

इस भोग से प्रसन्न होंगी मां, कटेगा हर कष्ट

शास्त्रों में हर देवी के लिए एक विशेष भोग बताया गया है. मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम भोग गुड़ माना गया है,सप्तमी के दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं. ऐसा माना जाता है कि भोग लगाने के बाद इस गुड़ का कुछ अंश दक्षिणा के साथ ब्राह्मण को दान करना चाहिए. मान्यता है कि गुड़ का भोग लगाने से व्यक्ति शोक, दरिद्रता और आकस्मिक आने वाले संकटों से बच जाता है. इससे शत्रुओं का नाश होता है और नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकल जाती है.

मां कालरात्रि की पूजा के लाभ

यदि आपको अज्ञात भय सताता है या बुरे सपने आते हैं, तो मां कालरात्रि की पूजा अमोघ फल देती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह को नियंत्रित करने के लिए मां कालरात्रि की पूजा सर्वोत्तम मानी जाती है. मां की कृपा से भक्त पर किसी भी प्रकार के टोने-टोटके या ऊपरी बाधा का असर नहीं होता.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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