गाजीपुर: रोस्टर के अनुसार तैनात किए गए दो राजपत्रित महिला डॉक्टर… ट्रामा सेंटर से आखिर कहां थी गायब?

गाजीपुर: नवरात्रि के पर्व पर 6 साल की मासूम के साथ हुआ था रेप और इलाज के नाम पर मेडिकल कॉलेज और ट्रामा सेंटर के बीच पेंडुलम की तरह कई घंटे तक दौड़ते रहे मासूम और उनके परिजन लेकिन जब कोई राहत नहीं मिली तब बैठ गए थे. धरने पर तब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए शासन में शिकायत करने की बात कही. तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी सामने आया और बताया कि जब मेडिको लीगल के लिए रोस्टर के अनुसार ट्रामा सेंटर में दो राजपत्रित डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है तो घटना के समय दोनों डॉक्टर कहां थे.

गाजीपुर जनपद के स्वास्थ्य विभाग में नवरात्रि की अष्टमी के दिन रेप पीड़िता बालिका जिसकी उम्र में 6 साल थी उसके इलाज को लेकर 8 से 9 घंटे तक इंतजार करना पड़ा, और जब सब्र का बात टूटा तब परिजनों ने हंगामा करते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था. जिसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील पांडे पहुंचे थे और उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की व्यवस्था को लेकर बयान देते हुए कहा कि हम इन लोगों के खिलाफ शासन को पत्र लिखेंगे.

वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बयान को लेकर अब मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आनंद मिश्रा ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता बुलाया और प्रेस वार्ता बुलाने के बाद उन्होंने बताया कि रेप के मामले में पिछले लगभग 1 साल पूर्व से जब से ट्रामा सेंटर का संचालन शुरू हुआ है उन्होंने मेडिको लीगल ट्रामा सेंटर में कराए जाने का निर्देश दिया है। जिसके लिए उन्होंने डॉक्टरों की रोस्टर के अनुसार नियुक्ति भी किया है । और एक दिन पूर्व की बात माने तो उन्होंने जिन दो डॉक्टरों की नियुक्ति मेडिकल के लिए ट्रामा सेंटर में किया था डॉ पल्ला ई राय और डॉ मनोरम यादव मौके पर मौजूद नहीं थी। जिसके कारण रेप पीड़िता का मेडिकल लिगो नहीं होने की वजह से समस्या आई थी। उन्होंने बताया कि उसके पूर्व महिला अस्पताल के अंदर ही डॉक्टर के द्वारा मेडिको लीगल किया जाता था.

उन्होंने बताया कि रेप पीड़िता के आने के बाद डॉक्टर के द्वारा उसे देखा गया था और एक मामूली सा टियर था जिससे छेड़खानी करने का कोई मतलब नहीं था और इसीलिए मेडिको लीगल के लिए भेजा गया था, और मेडिको लीगल भेजने से पहले उसे स्टेबल किया गया मेडिको लीगल करने वाले डॉक्टर ट्रामा सेंटर में मौजूद नहीं थे तो इसके बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी जाने.

उन्होंने बताया कि मेडिको लिगो के काम राजपत्रित अधिकारी के द्वारा किए जाते हैं जो मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अंडर में आते हैं इस दौरान उन्होंने मेडिको लीगल के लिए नियुक्त किए गए डॉक्टर के रोस्टर को भी दिखलाया. इस दौरान उन्होंने बताया कि दोपहर लगभग 3:00 बजे के आसपास रेप पीड़िता बालिका का मेडिकल किया गया जो घटना के तकरीबन 15 घंटे के बाद हुआ है.

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