नए वित्त वर्ष से बदलेगा टैक्स सिस्टम, फाइनेंस एक्ट 2026 लागू होने से बढ़ेगा बोझ

केंद्र सरकार द्वारा फाइनेंस एक्ट 2026 को अधिसूचित किए जाने के साथ ही नए वित्त वर्ष में टैक्स से जुड़े कई अहम बदलाव लागू हो जाएंगे। संसद से पारित इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब 1 अप्रैल से नई कर व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी, जिससे व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट टैक्सपेयर्स दोनों प्रभावित होंगे।
सरकार के अनुसार, इस अधिनियम के जरिए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित वित्तीय प्रस्तावों को लागू किया जाएगा। केंद्रीय बजट में इस बार कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वहीं, पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और राजकोषीय घाटा GDP के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य है।
नए प्रावधानों के तहत कंपनियों द्वारा शेयर बायबैक से होने वाले लाभ पर अब 12 प्रतिशत का समान सरचार्ज लगाया जाएगा। यह नियम व्यक्तिगत निवेशकों और कंपनियों दोनों पर लागू होगा, जिससे उनकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। पहले यह सरचार्ज आय के अलग-अलग स्लैब के आधार पर लगाया जाता था।
वर्तमान व्यवस्था में 50 लाख रुपये तक की आय पर कोई सरचार्ज नहीं लगता, जबकि 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत का सरचार्ज लागू होता है। नए नियम के बाद बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन पर एक समान 12 प्रतिशत सरचार्ज लागू होने से निवेशकों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और राजस्व संग्रह को मजबूत करने में मदद मिलेगी, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इससे कुछ निवेशकों की प्रभावी कर लागत बढ़ सकती है।









