मिडिल ईस्ट तनाव से शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के ₹51 लाख करोड़ डूबे

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारतीय शेयर बाजार पर गहराता जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है और बाजार में करीब 51 लाख करोड़ रुपये की पूंजी साफ हो गई है। इस दौरान बीएसई का बेंचमार्क सेंसेक्स 11 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है।
विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध की स्थिति के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है। 28 फरवरी के बाद से सेंसेक्स में 9 हजार अंकों से अधिक की गिरावट आ चुकी है, जिससे बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी तेजी से घटा है।
अपने उच्चतम स्तर 86,159 अंकों से सेंसेक्स करीब 16 प्रतिशत नीचे आ चुका है। इसी बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत भी बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिसने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मार्च महीने में भारतीय बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है, जो अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिकवाली मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट का मुख्य कारण घरेलू आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते निवेशकों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिख रहा है।
पिछले चार हफ्तों में बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति तेज हुई है, जो कोविड-19 महामारी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। सोमवार को भी बाजार में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक बाजारों में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।









