प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में निगम 120 करोड़ पीछे:तारीख बढ़ने से 15 करोड़ का नुकसान, अब 30 अप्रैल तक बढ़ी समय-सीमा

प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में इस बार नगर निगम टारगेट से काफी पीछे रह गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तय 475 करोड़ रुपए के टारगेट के मुकाबले अब तक करीब 350 करोड़ रुपए ही वसूले जा सके हैं। इस तरह निगम करीब 120 करोड़ रुपए पीछे चल रहा है।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन वसूली को लेकर बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे। 31 मार्च को करीब 25 करोड़ रुपए की वसूली का अनुमान था, लेकिन वसूली महज 7 करोड़ रुपए के आसपास ही सिमट गई।

इसकी बड़ी वजह संपत्तिकर जमा करने की अंतिम तिथि को 31 मार्च से बढ़ाकर 30 अप्रैल करना माना जा रहा है। तिथि बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में करदाताओं ने भुगतान टाल दिया, जिससे निगम को एक ही दिन में लगभग 15 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

बड़े बकायादार बने चुनौती

निगम की वसूली पर सबसे अधिक प्रभाव बड़े बकायादारों के कारण पड़ा है। जानकारी के अनुसार शहर में बड़े संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर करीब 150 करोड़ रुपए बकाया है।

आरोप है कि इन पर अपेक्षित सख्ती नहीं बरती गई, जबकि छोटे करदाताओं से नियमित रूप से वसूली जारी रही।

400 करोड़ तक पहुंचने की थी उम्मीद

29 मार्च तक अधिकारियों को भरोसा था कि अंतिम दो-तीन दिनों में वसूली तेज होगी और आंकड़ा 400 करोड़ रुपए के करीब पहुंच जाएगा, लेकिन समय-सीमा बढ़ने के बाद रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई।

अवकाश में भी खुले रहे जोन दफ्तर

31 मार्च को लक्ष्य पूरा करने के लिए नगर निगम के सभी जोन कार्यालय देर रात तक खुले रखे गए। कर्मचारियों ने करदाताओं से अपील भी की, लेकिन इसका अपेक्षित असर नहीं दिखा और वसूली सीमित ही रही।

जोनवार प्रदर्शन में भी अंतर

निगम के अलग-अलग जोन में वसूली का प्रदर्शन असमान रहा। कुछ जोन ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि कई जोन लक्ष्य से काफी पीछे रह गए।

अब अगले एक महीने पर फोकस

निगम अधिकारियों का कहना है कि तिथि बढ़ने के कारण कई करदाताओं ने भुगतान आगे के लिए टाल दिया है। अब 30 अप्रैल तक वसूली बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि लक्ष्य के करीब पहुंचा जा सके।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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