खिलाड़ी डरते हैं… मुनाफ पटेल ने BCCI के इस सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल

खिलाड़ी डरते हैं… मुनाफ पटेल ने BCCI के इस सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल

BCCI Center of Excellence: भारतीय क्रिकेट की नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) जिसके पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जाना जाता है, वो बेंगलुरु के पास स्थित है. यह सेंटर ट्रेनिंग, हाई परफॉर्मेंस कैंप्स, कोचिंग कोर्स, फिटनेस असेसमेंट, रिहैबिलिटेशन और इंजरी मैनेजमेंट का मेन हब है. लेकिन भारत के पूर्व तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि NCA अब खिलाड़ियों के विकास का सेंटर नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अस्पताल जैसा लगता है जहां सिर्फ चोट से उबरने के लिए जाना पड़ता है.

मुनाफ पटेल ने सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस पर उठाए सवाल

मुनाफ पटेल ने हाल ही में TOI स्पोर्ट्स के पॉडकास्ट में बात करते हुए NCA की मौजूदा व्यवस्था पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अब NCA जाने से डरते हैं. कोई भी वहां जाना नहीं चाहता, लेकिन अपने करियर को खतरे में डालने के डर से सब चुप रहते हैं. उनका मानना है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बड़े बदलाव की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘अंदर जाकर देखिए तो सब समझ आ जाएगा. मैं लंबे समय से कह रहा हूं कि इसमें 100 प्रतिशत बदलाव की जरूरत है.’

मुनाफ के मुताबिक, NCA की स्थापना 2000-01 के आसपास ऑस्ट्रेलिया के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मॉडल को अपनाकर की गई थी. उस समय राज सिंह डूंगरपुर जैसे अधिकारियों ने ऑस्ट्रेलिया का कोचिंग मैनुअल लाकर भारत में लागू किया था. लेकिन पिछले 25 साल में ऑस्ट्रेलिया ने अपना मैनुअल कई बार अपडेट कर लिया है और भारत अभी भी उसी पुराने सिस्टम पर चल रहा है. नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने की बातें होती रहती हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है.

NCA जाने से डरते हैं खिलाड़ी?

मुनाफ पटेल ने कहा कि NCA अब सिर्फ रिहैबिलिटेशन (चोट से उबरने) का सेंटर बन गया है. कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो उसे NCA भेजा जाता है, वहां फिट होता है और सीधे टीम में वापस आ जाता है. लेकिन असली समस्या यह है कि वहां कौन उसकी गलतियों को सुधारता है? गेंदबाज हो या बल्लेबाज, फिटनेस के साथ-साथ स्किल्स में भी सुधार की जरूरत होती है, जो NCA में नहीं हो रहा है.

मुनाफ पटेल का सबसे चौंकाने वाला बयान यह था कि खिलाड़ी NCA जाने से डरते हैं, लेकिन चुप रहते हैं क्योंकि उनकी रोजी-रोटी BCCI सिस्टम पर निर्भर है. कोई भी बोलने से बचता है, क्योंकि इससे परेशानी हो सकती है. उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारी को यह समझना चाहिए कि सिस्टम में क्या सही है और क्या गलत.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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