EL For Employees- छुट्टी में काम के बदले मिले अर्जित अवकाश: फेडरेशन ने उठाई आवाज, मध्यप्रदेश की तर्ज पर सुविधा देने की मांग

EL For Employees/रायपुर: छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए ‘छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन’ ने मोर्चा खोल दिया है।
फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान निर्वाचन, जनगणना और प्रशिक्षण जैसे शासकीय कार्यों में तैनात शिक्षकों को नियमानुसार ‘अर्जित अवकाश’ (Earned Leave) का लाभ दिया जाए। फेडरेशन का स्पष्ट कहना है कि जब शिक्षक अपनी छुट्टियों का त्याग कर शासन के महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा कर रहे हैं, तो उन्हें इसके बदले अर्जित अवकाश मिलना उनका न्यायसंगत अधिकार है।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों को मजबूती से रखते हुए बताया कि प्रदेशभर में बड़ी संख्या में शिक्षक बीएलओ (BLO) ड्यूटी, निर्वाचन संबंधी कार्यों और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश का उद्देश्य शिक्षकों को विश्राम देना होता है, लेकिन ड्यूटी की वजह से वे इस लाभ से वंचित रह जाते हैं।
ऐसे में फेडरेशन ने मांग की है कि कार्य की अवधि के अनुपात में इन शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड में अर्जित अवकाश जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) को स्पष्ट निर्देश जारी करने की भी अपील की है, ताकि शिक्षकों की सेवा पुस्तिका में इस अवकाश का विधिवत इंद्राज सुनिश्चित हो सके।EL For Employees
अपनी मांगों के समर्थन में फेडरेशन ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश का उदाहरण भी पेश किया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में शिक्षकों को इस प्रकार की शासकीय ड्यूटियों के बदले सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, तो फिर छत्तीसगढ़ में इसे लागू करने में देरी क्यों? इसके साथ ही फेडरेशन ने प्रदेश में चल रही भीषण लू और बढ़ते तापमान पर भी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि फील्ड में काम कर रहे शिक्षकों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि वे बिना किसी स्वास्थ्य जोखिम के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।EL For Employees
शिक्षक फेडरेशन ने जोर देकर कहा कि शिक्षक न केवल स्कूलों में शैक्षणिक स्तर सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं, बल्कि वे हर प्रशासनिक जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाते हैं। ऐसे में सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह शिक्षकों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए। संघ को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करते हुए जल्द ही कोई ठोस आदेश जारी करेगी, जिससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों को राहत मिल सके और उनके कार्य के प्रति उत्साह बना रहे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र कुमार राठौर, प्रदेश सचिव राजू टंडन, उपाध्यक्ष देवेंद्र हरमुख, संयोजक मनीष मिश्रा, संगठन मंत्री शेषनाथ पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुर्रे, सुरजीत सिंह चौहान, सिराज बक्श, पुरुषोत्तम झाड़ी, आदित्य गौरव साहू, टिकेश्वर भोई, तरुण वैष्णव, गोकुल जायसवाल, विजेंद्र चौहान, रोशन सहारे, नोहर चंद्रा, राजेंद्र वर्मा, मनीष डडसेना, हुलेश चंद्राकार, उमा पाण्डेय, नेमी सिन्हा, विपिन यादव, रूपिका रानी मरकाम, चंद्रप्रकाश तिवारी, दिलीप लहरें, अशोक धुर्वे, वीरेंद्र यादव, पंकज लहरें, दिनेश नायक, अशोक नाग, राम नरेश अजगल्ले, कोमल साहू, रीता भगत, महेश सेठी, दुर्गा वर्मा, मंजू देवांगन, बुधनी अजय, काशी नाथ बघेल, यशवंत यादव, मनोज कश्यप, सीडी भट्ट, रणजीत बनर्जी, आलोक त्रिवेदी, त्रिपेश चापड़ी, संतोष यादव, केशरी पैकरा, प्रदीप पटेल, आशीष गुप्ता, यशवंत दुबे, अभिजीत तिवारी, हेमकुमार साहू, छबि पटेल, इंद्रजीत शर्मा, बिहारीलाल बेरठ, राजेश मिश्रा, रामकृष्ण साहू, उत्तम बघेल, राजा राम पटेल, धनंजय सिंह, नान्हू राजवाड़े, रविन्द्र गिरी, दीनबंधु वैष्णव सहित सैकड़ों शिक्षक और पदाधिकारी मौजूद रहे।









