गुर्जर और मीणा की अदावत में 74 गांव परेशान, 20 सालों से क्यों नहीं सुलझ रहा राजस्थान का पांचना बांध पानी विवाद?

राजस्थान में पानी की किल्लत और उसको लेकर सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी गतिरोध की खबरें नई बात नहीं हैं.ताजा विवाद पूर्वी राजस्थान के लिए लाइफलाइन कहलाने वाले पांचना बांध की है. इससे करौली, सवाई माधोपुर और गंगापुरसिटी के 74 गांवों में तनाव की स्थिति है. दशकों पुराने विवाद का यह जिन्न राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर बाहर निकल आया है.
पानी के महासंग्राम में 74 गांव परेशान
1.डूब क्षेत्र के किसानों की चेतावनी सारी मांगें पूरी होने तक नहीं खुलेंगे पांचना बांध के गेट 2.हाईकोर्ट ने 20 साल में तीसरी बार इस मामले दिया दखल. फिर आदेश नहीं हुआ पालन 2.हाईकोर्ट का शासन को 3 हफ्ते का अल्टीमेटम. अधिकारियों पर कार्रवाई की लटकी तलवार 4.पानी के महासंग्राम में गुर्जर और मीणा समाज के किसान आमने-सामने
साल 2005 के बाद फिर नहीं छोड़ा गया पांचना बांध से पानी
पांचना बांध का निर्माण डूब क्षेत्र को हर साल आने वाली बाढ़ से बचाने और ऊपरी यानी कमांड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से किया गया था. इस बांध की कुल भराव क्षमता 258.62 मीटर यानी 2100 एमसीएफटी रखी गई. निर्माण के बाद कमांड क्षेत्र के 35 गांवों की करीब 9985 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य रखा गया. लेकिन साल 2005 में एक ही बार सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया.
साल 2006 में गुर्जर आंदोलन से डूब क्षेत्र के निवासियों ने बांध के गेट खुलने नहीं दिए. तब से पांचना डैम से कमांड क्षेत्र के किसानों को पानी नसीब नहीं हुआ है. हालांकि, साल में एक बार जरूर प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल श्रीमहावीरजी मेले के दौरान भगवान के अभिषेक के लिए ही बहुत ही सीमित मात्रा में पानी नदी के रास्ते आगे भेजा जाता है.
पानी की लड़ाई गुर्जर और मीणा समाज की अदावत पर कैसे आई?
बता दें कि बांध के डूब क्षेत्र में करोली जिले के 39 गांव आते हैं. इन गांवों की बहुसंख्यक आबादी गुर्जर समाज की है. यहां के लोगों का कहना है कि बांध के निर्माण के दौरान उनकी खेती की जमीनें और मकान पानी में चले गए. उनका कहना है कि जब तक इन जमीनों का उचित मुआवजा के साथ-साथ यहां के युवाओं को रोजगार और सिंचाई के लिए स्वीकृत गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का पूरा पानी उन्हें नहीं मिल जाता तब तक वह बांध का फाटक किसी को खोलने नहीं देंगे.
वहीं, कमांड क्षेत्र में सवाई माधोपुर और नवगठित गंगापुर सिटी जिले के कुल 35 गांव शामिल हैं. इन गांवों में बहुसंख्यक आबादी मीणा समाज की है, लेकिन सर्वसमाज के लोग भी रहते हैं. जब बांध का निर्माण हो रहा था, तो उसकी मुख्य नहरों से सिंचाई का पानी इन नहरों को मिलने तय था.
हालांकि, साल 2006 के बाद से उन्हें पानी की एक बूंद नसीब नहीं हो पाई है. एक आंकड़े के मुताबिक 40,000 बीघा उपजाऊ जमीन सिंचाई के ना उपलब्ध होने के चलते बंजर होने की कगार पर है. इसके चलते अब तक 4 हजार करोड़ रुपये आर्थिक नुकसान प्रत्यक्ष तौर पर झेलना पड़ा है. ऐसे में एक-दूसरे की पक्ष की तरफ से बहुसंख्यक आबादी होने के चलते पानी की यह लड़ाई गुर्जर और मीणा समाज के अदावत पर आ गई है.
हाईकोर्ट के फैसले के और गरमाया यह मामला
लगातार 20 सालों से चला आ रहा है पानी के इस विवाद ने उग्र रूप तब ले लिया, जब हाईकोर्ट ने सरकार को पांचना बांध का पानी जल्द कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़ने का आदेश दिया. अदालत की तरफ से ऐसा आदेश पिछले 20 सालों में तीसरी बार दिया गया है. लेकिन अब तक इस आदेश का जमीन पर कभी पालन नहीं हो पाया है. फिलहाल, इस मसले पर अदालत ने सख्त रूप अपना लिया है.
हाईकोर्ट ने शासन को अल्टीमेटम दे दिया है. अदालत ने कहा है कि अगले 3 हफ्ते के भीतर अगर पांचना बांध से कमांड क्षेत्र के नहरों की तरफ पानी नहीं छोड़ा गया तो इसे अदालत के आदेश की अवहेलना मानी जाएगी. ऐसे में इस मामले से संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया जाएगा. अदालत उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करेगी.
करौली और गंगापुर सिटी के सीमा पर स्थिति खंडीप गांव में पिछले 10 दिन से धरने पर बैठे कमांड क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वर्ष 1992 से 2005 तक उन्हें नहरों के माध्यम से नियमित पानी मिलता रहा है. लेकिन 2006 के बाद से बंद कर दिया गया है. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कमांड क्षेत्र की तरफ पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. किसानों ने कहा कि अगर 27 जून तक सरकार कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं करती है तो 28 जून को रेल रोको आंदोलन किया जाएगा.
कैबिनेट मंत्री किशोरीलाल मीणा की खुद की सरकार को चेतावनी
इन सबके बीच इस मामले में कैबिनेट मंत्री किशोरीलाल मीणा के हस्तक्षेप से मामला और गरमा गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल को पत्र लिखते हुए कहा है कि यदि राज्य सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए तुरंत नहरों में पानी नहीं छुड़वाया, तो वे अपने मंत्रिपद की चिंता किए बिना किसानों के साथ धरने पर बैठ जाएंगे. फिलहाल, डूब क्षेत्र में बहुसंख्यक आबादी गुर्जरों के होने और कमांड क्षेत्र में मीणा समाज के लोगों की संख्या अधिक होने को चलते यह मामला दो जातियों के संघर्ष में तब्दील होती जा रही है.










