प्रयोगधर्मी रंगमंच की अग्रणी हस्ती विजया मेहता का निधन, कला जगत में शोक की लहर

मुंबई। भारतीय रंगमंच और सिनेमा जगत की प्रतिष्ठित हस्ती विजया मेहता का मंगलवार रात निधन हो गया। वह 91 वर्ष की थीं और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। दक्षिण मुंबई स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि अभिनेता विजय केनकरे ने की। उनके जाने से कला और रंगमंच जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
रंगमंच को नई दिशा देने वाली शख्सियत
‘बाई’ के नाम से प्रसिद्ध विजया मेहता मराठी रंगमंच की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में गिनी जाती थीं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अभिनेत्री के रूप में की, लेकिन बाद में एक सफल और दूरदर्शी रंगमंच निर्देशक के रूप में पहचान बनाई। कई दशकों तक उन्होंने थिएटर की दुनिया में सक्रिय रहकर कलाकारों की कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया।
रंगायन के जरिए शुरू किया प्रयोगधर्मी आंदोलन
1960 के दशक में विजया मेहता ने नाटककार विजय तेंदुलकर, डॉ. श्रीराम लागू, अरविंद देशपांडे और अन्य कलाकारों के साथ मिलकर प्रयोगात्मक रंगमंच समूह ‘रंगायन’ की स्थापना की। यह समूह अपनी अनूठी कार्यशैली और गुणवत्ता-आधारित प्रस्तुतियों के लिए जाना गया।
रंगायन में प्रत्येक नाटक का बजट पहले से तय किया जाता था और उसे केवल छह प्रदर्शनों तक ही मंचित किया जाता था। व्यावसायिक सफलता से अधिक कलात्मक गुणवत्ता को महत्व देना इस समूह की पहचान थी।
स्वतंत्र निर्देशक के रूप में बनाई अलग पहचान
बाद के वर्षों में विजया मेहता ने स्वतंत्र निर्देशक के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित की। उनके समकालीनों का मानना था कि उन्होंने कभी भी अपने लिंग को राजनीतिक पहचान का माध्यम नहीं बनाया, लेकिन उनके निर्देशन में महिला दृष्टिकोण की संवेदनशीलता और गहराई स्पष्ट दिखाई देती थी।
कई यादगार नाटकों का किया निर्देशन
विजया मेहता ने मराठी रंगमंच को कई कालजयी प्रस्तुतियां दीं। उनके निर्देशन में मंचित प्रमुख नाटकों में ‘एक शून्य बाजीराव’, ‘बैरिस्टर’, ‘हमीदाबाईची कोठी’, ‘पुरुष’, ‘महासागर’ और ‘शाकुंतल’ शामिल हैं। इन नाटकों ने उन्हें भारतीय रंगमंच के शीर्ष निर्देशकों की श्रेणी में स्थापित किया।
फिल्मों में भी छोड़ी अमिट छाप
रंगमंच के साथ-साथ विजया मेहता ने सिनेमा जगत में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने ‘राव साहब’ (1986) और ‘पेस्टनजी’ (1988) जैसी चर्चित हिंदी फिल्मों का निर्देशन किया। वहीं अभिनेत्री के रूप में गोविंद निहलानी की फिल्म ‘पार्टी’ (1984) में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
विजया मेहता को उनके योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी टैगोर रत्न, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। फिल्म ‘पार्टी’ के लिए उन्हें एशिया पैसिफिक फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला था










