‘ओके चाचा! सब हो जाएगा..’, जेलर के फोन से 34 साल पुराने अजमेर कांड के मास्टरमाइंड को कैदियों का वीडियो कॉल, उठे गंभीर सवाल

अजमेर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला वीडियो सामने आया है. वीडियो में जेल के अंदर से तीन सजायाफ्ता कैदी 1992 के चर्चित अजमेर ब्लैकमेलिंग कांड के मास्टरमाइंड नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि यह वीडियो कॉल जेलर सद्दाम हुसैन के ऑफिस में और उसके मोबाइल फोन से कराई गई.

वीडियो में जेल में बंद तारिक चिश्ती उसका बेटा तौसीफ चिश्ती उर्फ चिंकी और भांजा फखर जमाली नफीस चिश्ती से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं. तीनों को 2014 में हाजी सैयद बिलाल हुसैन चिश्ती पर जानलेवा हमला करने के मामले में 2025 में 7-7 साल की सजा सुनाई गई थी. हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था. फिलहाल तारिक और फखर जमानत पर हैं, जबकि तौसीफ चिश्ती अजमेर जेल में बंद है.

वीडियो कॉल के समय तीनों सेंट्रल जेल में थे

वीडियो कॉल के समय तीनों सेंट्रल जेल में मौजूद थे. वीडियो में जेलर सद्दाम हुसैन अपने ऑफिस में बैठे कैदियों को मोबाइल के जरिए नफीस चिश्ती से बात करवाता नजर आता है. तीनों कैदी जेलर के आसपास इस तरह बैठे दिखाई दे रहे हैं मानो उन्हें किसी विशेष सुविधा के तहत बातचीत कराई जा रही हो. वीडियो कॉल शुरू होने पर नफीस चिश्ती और जेलर सद्दाम के बीच हंसते हुए दुआ-सलाम होती है नफीस पूछता है,कहां हैं हमारे तारिक भाई? इसके बाद जेलर मोबाइल कैमरा बगल में बैठे तारिक की ओर घुमा देता है और दोनों की बातचीत करवाता है.

नफीस कहता है, मैं तो पूछता रहता हूं सद्दाम से हमेशा तुम्हारे बारे में. कहता हूं कि तारिक भाई का ध्यान रखना. इसके बाद नफीस तारिक से पूछता है, कहां हैं, चिंकी और फखर कहां हैं? तारिक इशारा करके दोनों के पास होने की बात बताता है. इसके बाद जेलर मोबाइल दोनों की ओर घुमा देता है और उनकी भी नफीस से बातचीत करवाता है. हालचाल जानने के बाद नफीस कहता है, बाकी सब करा देंगे. बेफिक्र रहो. इस दौरान नफीस अपने पास बैठे हनीफ नाम के व्यक्ति से भी तीनों की बातचीत करवाता है.

वीडियो कॉल पर होती हैं ये बातें

बातचीत के दौरान तारिक कहता है, टेंशन की कोई बात नहीं है. बढ़िया हैं हम तो. तारिक आगे कहता है, रमीज आया था यहां पर. इस पर नफीस जवाब देता है, हां, रमीज और सरवर भाई आए थे. मैंने ही कहा था कि जा मिल आ जाकर. मसूद को बुलाया है. मैंने, कहा है मैं सब करवा दूंगा.” नफीस आगे कहता है, सद्दाम को कहा था मैंने, उन्होंने कहा था आप कर लेना, मैं करवा दूंगा आपकी बातचीत आराम से रहो.”

तीनों से बातचीत पूरी होने के बाद जेलर सद्दाम हुसैन नफीस चिश्ती से कहता है, ओके चाचा. अंत में नफीस जेलर का शुक्रिया अदा करता है. मामले को लेकर अजमेर सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक आर. अंतेश्वरन ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से इस वीडियो के बारे में जानकारी मिली है. उन्होंने बताया कि वीडियो कुछ समय पुराना है, जिसमें जेलर सद्दाम द्वारा अपने मोबाइल से जेल में बंद आरोपियों की बाहर मौजूद लोगों से बातचीत कराई गई है.

मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी

जेल अधीक्षक के अनुसार, यह मामला जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में जेल डीजी से चर्चा की गई है और मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. वहीं, वीडियो कॉल में जेलर सद्दाम हुसैन जिस नफीस चिश्ती से बातचीत करवा रहा है, वह 1992 के चर्चित अजमेर ब्लैकमेलिंग कांड का मास्टरमाइंड रहा है. रिहा होने के बाद भी उसका नाम अलग-अलग आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है.

जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

करीब आठ साल पहले तत्कालीन एसपी विकास कुमार की विशेष पुलिस टीम ने नफीस चिश्ती के घर पर कार्रवाई करते हुए 5.20 करोड़ रुपए का सट्टा पकड़ा था. इसके अलावा 24 करोड़ रुपए की स्मैक तस्करी के मामले में भी गुजरात पुलिस ने नफीस चिश्ती और फारुख चिश्ती को आरोपी माना था. अब अजमेर सेंट्रल जेल के अंदर से सामने आए इस वीडियो ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, कैदियों को मिलने वाली कथित विशेष सुविधाओं और जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

वीडियो में जेलर के निजी मोबाइल से जेल के अंदर बंद कैदियों की बाहर मौजूद नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल पर बातचीत कराए जाने को लेकर जांच और कार्रवाई की मांग उठ रही है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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