चीन को घेरने की अमेरिका की अंडरवाटर तैयारी, 19 अमेरिकी पनडुब्बियां क्यों बनेंगी बड़ी चुनौती?

प्रशांत महासागर में अमेरिका और चीन की सैन्य होड़ अब सिर्फ युद्धपोत, विमान और मिसाइलों तक सीमित नहीं है. समुद्र के नीचे पनडुब्बियों की ताकत बढ़ाने की होड़ भी तेज हो रही है. ताइवान को लेकर संभावित संघर्ष में पनडुब्बियां अहम भूमिका निभा सकती हैं. इसी वजह से अमेरिकी नौसेना करीब 19 वर्जीनिया क्लास परमाणु पनडुब्बियों को गाइडेड मिसाइल सबमरीन यानी SSGN की भूमिका में तैयार कर रही है.

इन पनडुब्बियों में वर्जीनिया पेलोड मॉड्यूल (VPM) लगाया जाएगा. यह करीब 84 फीट लंबा अतिरिक्त हिस्सा है, जिसमें चार बड़े लॉन्च ट्यूब होंगे. हर ट्यूब में सात टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें रखी जा सकती हैं. यानी एक पनडुब्बी में 28 अतिरिक्त मिसाइलें जुड़ेंगी और उसकी कुल टॉमहॉक क्षमता 12 से बढ़कर करीब 40 हो जाएगी. VPM भविष्य में बड़े हथियारों और हाइपरसोनिक हथियारों के इस्तेमाल की क्षमता भी बढ़ाएगा.

चीन के खिलाफ क्यों अहम?

चीन ने लंबी दूरी की मिसाइल, रडार और एयर डिफेंस का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है, जिसका मकसद अमेरिकी युद्धपोतों को चीन के करीब आने से रोकना है. ऐसे में पनडुब्बियां अमेरिका के लिए अहम हैं, क्योंकि वे पानी के नीचे छिपकर लंबे समय तक काम कर सकती हैं और उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है.

इस रणनीति में फर्स्ट आइलैंड चेन महत्वपूर्ण है. यह जापान से ताइवान और फिलीपींस तक जाने वाली द्वीपों की श्रृंखला है. संभावित ताइवान युद्ध में अमेरिकी पनडुब्बियां चीन के रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाकर उसकी रक्षा व्यवस्था कमजोर कर सकती हैं.

ओहायो क्लास की जगह आएगी वर्जीनिया

अमेरिका की चार पुरानी ओहायो क्लास SSGN- ओहायो, मिशिगन, फ्लोरिडा और जॉर्जिया अब रिटायर हो रही हैं. ये पनडुब्बियां पहले बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां थीं. एक ओहायो क्लास SSGN में 154 तक टॉमहॉक रखी जा सकती हैं. इसके लिए 22 लॉन्च ट्यूबों को बदला गया था और हर ट्यूब में सात मिसाइलें रखी जा सकती हैं. इन चारों की रिटायरमेंट 2026 से 2028 के बीच होगी. इसके मुकाबले पहली नई वर्जीनिया क्साल SSGN 2029 में और आखिरी 2038 तक सेवा में आने की योजना है.

यह बदलाव पूरी तरह एक-जैसा नहीं है. एक Ohio की 154 मिसाइलों के मुकाबले वर्जीनिया करीब 40 मिसाइलें लेगी. यानी एक ओहायो की फायरपावर के बराबर पहुंचने के लिए करीब चार वर्जीनिया चाहिए. लेकिन अमेरिका मिसाइलों को कई पनडुब्बियों में बांटकर चीन के लिए उन्हें खोजना और ट्रैक करना मुश्किल बनाना चाहता है.

चीन भी तेजी से बढ़ा रहा ताकत

IISS (इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज) के मुताबिक, 2021-25 में चीन ने 10 और अमेरिका ने 7 परमाणु-संचालित पनडुब्बियां लॉन्च कीं. चीन की इन पनडुब्बियों का कुल टन भार करीब 79,000 टन, जबकि अमेरिका का 55,500 टन रहा. IISS के 2025 के आकलन के मुताबिक चीन के पास 52 अटैक सबमरीन थीं, जिनमें 6 परमाणु-संचालित थीं. उसकी आधुनिक अटैक सबमरीन की संख्या पिछले दशक में 8 से बढ़कर 16 हो गई, जबकि पुरानी पनडुब्बियां 14 से घटकर चार रह गईं.

असली मुकाबला 2029 के बाद

अमेरिका के सामने बड़ी चुनौती यह है कि ओहायो क्लास पहले रिटायर हो रही हैं और नई वर्जीनिया SSGN बाद में आएंगी. इसके अलावा वर्जीनिया निर्माण की वास्तविक दर 2022 के बाद करीब 1.1-1.2 पनडुब्बी प्रति वर्ष रही, जबकि लक्ष्य हर साल दो बनाने का है.

यानी अमेरिका पुरानी भारी क्षमता वाली ओहायो की जगह ज्यादा संख्या में आधुनिक वर्जीनिया पनडुब्बियां लाकर अपनी अंडरवाटर ताकत बनाए रखना चाहता है. वहीं चीन भी पनडुब्बियां, मिसाइलें और अंडरवाटर ड्रोन्स तेजी से बढ़ा रहा है. इसलिए भविष्य के अमेरिका-चीन संघर्ष में समुद्र की गहराई भी बड़ा युद्धक्षेत्र बन सकती है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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