UN में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, बिन लादेन का नाम लेकर आतंकवाद पर घेरा

UN महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन पर भारत ने तीखा पलटवार किया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फ़र्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई के तहत पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और दोहरे रवैये का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बार-बार झूठ दोहराने से वह सच नहीं बन जाता. इस दौरान उन्होंने 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को घेरा. इसके साथ ही चेतावनी दी कि सीमा पार आतंकवाद के गंभीर नतीजे होंगे.
अपने संबोधन के दौरान पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में मिला था. उन्होंने कहा ‘आज दोपहर, जनरल असेंबली ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की कुछ अजीब बातें सुनीं. यह घटना न्यूयॉर्क शहर और दुनिया द्वारा भयानक 9/11 आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाने के ठीक दो हफ़्ते बाद हुई है. इस संदर्भ को ध्यान में रखना ज़रूरी है क्योंकि इसका मास्टरमाइंड, ओसामा बिन लादेन, पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक पास रह रहा था. यही वह संस्था थी जिसके सामने आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने इतना गहरा सम्मान दिखाया. लेकिन पाकिस्तान के लोग जिसे खुद ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहते हैं, उससे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है’.
#WATCH | New York | Exercising the right of reply of India on Pakistan PM Shehbaz Sharif’s speech, First Secretary in India’s Permanent Mission to the UN, Petal Gahlot says, “This afternoon, the General Assembly heard some bizarre remarks from the representative of Pakistan. This pic.twitter.com/ICH056qzQB
— ANI (@ANI) September 26, 2026
भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आगे कहा ‘हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों के बारे में पाखंडपूर्ण बातें उस सरकार से सुनीं, जिसकी राजधानी में इस समय अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है, और मिस्टर प्रेसिडेंट, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए बनी सरकार है. उनके कठपुतली नेता आ-जा सकते हैं, लेकिन हमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असली फ़ैसले कौन लेता है. पाकिस्तान की सच्चाई उसके 27वें संशोधन और उसके असली शासक को मिली आजीवन छूट से ज़ाहिर होती है’.
गहलोत ने ‘मिस्टर प्रेसिडेंट, हमने जो विचार सुने, वे ऐसे लोगों की तरफ़ से आए हैं जिनका कट्टरता और नफ़रत का लंबा इतिहास रहा है. वे दिन में सुरक्षा बनाए रखने का दावा करते हैं और असल में वे रात में आतंकवाद फैलाते हैं. इस असेंबली में धार्मिक असहिष्णुता के बारे में बातें उस सरकार ने कीं, जिसका मुख्य आधार ही ईशनिंदा कानून हैं. दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. कोई भी खोखली-मीठी बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं’.
भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का ज़िक्र किया गया. पेटल गहलोत ने कहा कि ‘यह मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा. लेकिन अगर हमें कश्मीर के बारे में बात करनी ही है, तो आइए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान दें. रावलकोट के लोगों से उन बे-वजह हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए, जिन्हें वे लंबे समय से झेल रहे हैं’.
गहलोत ने कहा ‘मिस्टर प्रेसिडेंट इस मुद्दे की जड़ में पाकिस्तान द्वारा लंबे समय से किया जा रहा सीमा-पार आतंकवाद है. हमने पिछले साल दिखाया था कि आतंकवादियों के पास भागने या छिपने की कोई जगह नहीं होगी. हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपना बचाव करने के अधिकार का इस्तेमाल करेंगे और पाकिस्तान की तरफ़ से जारी आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे. ज़ाहिर है, इससे दोस्ती और सद्भावना पर आधारित रिश्तों पर सवाल उठेंगे’.











