चाय की दुकान से प्रधानमंत्री पद तक, नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर के ये रहे बड़े पड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले मोदी का शुरुआती जीवन पढ़ाई के साथ परिवार की मदद करने में बीता। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, उन्होंने कम उम्र में ही अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर संगठनात्मक काम शुरू किया और 1972 में संघ के प्रचारक बने।
उनका राजनीतिक सफर संगठन के कार्यकर्ता से गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा। अक्टूबर 2001 में उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और मई 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2014 में उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
वडनगर और संघ से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा
वडनगर में बीता बचपन नरेंद्र मोदी के जीवन का शुरुआती चरण रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण उन्होंने कम उम्र में परिवार के काम में हाथ बंटाया। बाद में वे संघ से जुड़े और प्रचारक के तौर पर संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ काम करने, लोगों से संवाद करने और संगठन को मजबूत करने का अनुभव हासिल किया।
1970 के दशक में आपातकाल के दौरान भी वे लोकतंत्र बहाली से जुड़े आंदोलन में सक्रिय रहे। इसके बाद 1980 के दशक में संगठन में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। 1987 में उन्होंने गुजरात में भाजपा के संगठनात्मक काम में महत्वपूर्ण भूमिका संभाली और चुनावी संगठन तैयार करने में सक्रिय रहे।
संगठन से गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक
1990 के दशक में नरेंद्र मोदी की भूमिका भाजपा के संगठन में लगातार बढ़ी। वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक काम से जुड़े और कई राज्यों में पार्टी की गतिविधियों को संभाला। सितंबर-अक्टूबर 2001 में उन्हें गुजरात की सरकार की जिम्मेदारी मिली। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में गुजरात में बुनियादी ढांचे, निवेश, बिजली, पानी और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। 2001 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण भी राज्य के सामने बड़ी चुनौती थी। उनके शासन के दौरान गुजरात के विकास मॉडल को लेकर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग मत रहे।
2002 के बाद राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी पहचान
2002 के गुजरात दंगों ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। उनकी सरकार की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी बहस होती रही। वहीं, बाद के वर्षों में मोदी ने विकास, प्रशासन और निवेश को अपनी राजनीतिक पहचान के प्रमुख हिस्सों के तौर पर आगे बढ़ाया।
मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 साल के कार्यकाल के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। 2013 में उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया।
2014 में प्रधानमंत्री बनने से तीसरे कार्यकाल तक
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस चुनाव में भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला और केंद्र में सरकार सहयोगी दलों के समर्थन के साथ बनी। इस तरह वडनगर से शुरू हुई उनकी यात्रा देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची और 2026 में वे सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं।











