छत्तीसगढ़: अवैध गुड़ उद्योगों पर कलेक्टर का फिर ताबड़तोड़ एक्शन, तीसरे दिन भी शक्कर कारखाना पहुंचकर मचाया हड़कंप

सूरजपुर: जिले में अवैध रूप से संचालित गुड़ उद्योगों के खिलाफ प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है. लगातार तीसरे दिन कलेक्टर एवं माँ महामाया सहकारी शक्कर कारखाना के प्रशासक एस. जयवर्धन ने सख्त तेवर दिखाते हुए आज फिर शक्कर कारखाना केरता पहुंचकर अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई. कलेक्टर की इस निरंतर कार्रवाई से जिले भर के गुड़ उद्योग संचालकों और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है.

आज के औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शक्कर कारखाना परिसर, शक्कर गोदाम में उपलब्ध स्टॉक, गन्ना खरीदी व्यवस्था, रिकॉर्ड संधारण और कारखाने से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान कई बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई और साफ चेतावनी दी कि “अब किसी भी हाल में अवैध गुड़ फैक्ट्री नहीं चलने दी जाएगी.”

कलेक्टर ने दो टूक कहा कि शासन द्वारा तय नियम, मापदंड और निर्धारित प्रारूपों की अनदेखी करने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 31 दिसंबर तक जिले के सभी गुड़ उद्योगों से तय प्रारूप में संपूर्ण जानकारी अनिवार्य रूप से एकत्र की जाए और प्रत्येक उद्योग की भौतिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए.

मीडिया में लगातार प्रकाशित खबरों और जन शिकायतों का उल्लेख करते हुए कलेक्टर ने कहा कि अवैध गुड़ उद्योग न केवल किसानों के हितों से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण, मंडी व्यवस्था और शासन के राजस्व को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई तय है.

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शक्कर गोदाम में रखे स्टॉक का रजिस्टर से मिलान कराया, रिकवरी प्रतिशत, उत्पादन क्षमता और गन्ना आवक की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि कारखाने में आने वाले गन्ने की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का पूरा लाभ मिल सके और शक्कर रिकवरी प्रभावित न हो.

कलेक्टर ने दोहराया कि शक्कर कारखाना क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा, स्थायी और सुरक्षित बाजार है. यदि कारखाने की व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। इसलिए कारखाना प्रबंधन, कृषि विभाग, सहकारिता और राजस्व विभाग को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए.

सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर की इस सख्ती के बाद कई गुड़ उद्योग संचालकों में बेचैनी बढ़ गई है. वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर चल रहे बिना लाइसेंस, बिना मंडी शुल्क और प्रदूषण मानकों की अनदेखी करने वाले उद्योग अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गए हैं.

निरीक्षण के दौरान एसडीएम प्रतापपुर ललिता भगत, तहसीलदार चंद्रशीला जायसवाल, प्रबंध संचालक आकाशदीप पात्रे, मुख्य गन्ना विकास अधिकारी प्रमोद चौहान, चीफ केमिस्ट मनोज पाड़ी, मुख्य अभियंता सुनील तिवारी सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे.

अब पूरे जिले की निगाहें 31 दिसंबर के बाद प्रशासन द्वारा की जाने वाली ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं. कलेक्टर की लगातार सक्रियता और सख्त रुख से यह साफ संकेत मिल रहा है कि इस बार अवैध गुड़ उद्योगों की खैर नहीं और किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों पर प्रशासन निर्णायक प्रहार करने जा रहा है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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