दुर्ग अफीम खेती मामले में पूर्व भाजपा नेता को हाईकोर्ट से जमानत, FIR रद्द करने की मांग खारिज

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में करीब 5 एकड़ जमीन पर कथित अवैध अफीम की खेती के मामले में पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान माना कि कार्रवाई के वक्त विनायक खेत में मौजूद नहीं थे और उनके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR और आरोप पत्र को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
जमानत के साथ रखी गईं कई शर्तें
अदालत ने विनायक ताम्रकार को कई शर्तों के साथ जमानत दी है। उन्हें दुर्ग जिला छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस 29 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसी मामले के सह आरोपी सुखराम विश्नोई और मदरूपा राम विश्नोई को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मिली थी अफीम
मामला पुलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम समोदा-झेंझरी का है। 6 मार्च को पुलिस को करीब 5 एकड़ कृषि जमीन पर अफीम की कथित अवैध खेती की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान खसरा नंबर 309 और 310 की जमीन पर अफीम के पौधे मिले।
कार्रवाई के दौरान करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगे पौधे जब्त किए गए थे। पुलिस ने जब्त अफीम के पौधों की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई थी। पौधों को नष्ट करने के लिए पहले पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और बाद में अधिक संख्या में पौधे होने के कारण बुलडोजर की मदद ली गई।
939 पन्नों की चार्जशीट, 78 गवाह
पुलिस ने मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि दो आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं। विनायक ताम्रकार समेत तीन लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया था। विनायक को 7 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और वह तब से जेल में थे।
जांच के बाद पुलिस ने अदालत में 939 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से 78 गवाहों का उल्लेख है। कार्रवाई में पुलिस के साथ राजस्व, आबकारी, नारकोटिक्स और अपराध जांच से जुड़ी टीमें भी शामिल थीं।
खेत की सुविधाओं को लेकर सामने आया विवाद
अभियोजन पक्ष ने विनायक की भूमिका को खेत में मौजूद पानी की व्यवस्था, बिजली, पंप, फव्वारा सिंचाई, CCTV और खेती से जुड़ी अन्य सामग्री के आधार पर बताया। वहीं बचाव पक्ष का कहना था कि कार्रवाई के समय विनायक खेत में मौजूद नहीं थे और उनके कब्जे से अफीम या कोई अन्य मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने माना कि केवल खेत में कृषि सुविधाएं मौजूद होने से यह साबित नहीं होता कि विनायक का जानबूझकर उस पर कब्जा था या वह अफीम की खेती में सीधे तौर पर शामिल थे।
FIR और आरोप पत्र रद्द करने से कोर्ट का इनकार
विनायक की ओर से FIR और आरोप पत्र रद्द करने की अलग याचिका भी दायर की गई थी। अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों की गहराई से जांच करके मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ऐसा करना ट्रायल से पहले ही मामले की पूरी सुनवाई करने जैसा होगा।
इस तरह विनायक ताम्रकार को जमानत मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामला खत्म नहीं हुआ है। मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी। ट्रायल में गवाहों के बयान 9 सितंबर से दर्ज किए जाने हैं।










